आइए जानते हैं कब से शुरू होगा पितृ पक्ष
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से पितृ पक्ष की शुरुआत होती है। इस अवधि को श्राद्ध पक्ष भी कहते हैं, जिसका समापन सर्वपितृ अमावस्या के दिन होता है। मान्यता है कि इस दौरान पूर्वजों की आत्माएं पृथ्वी पर आती हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों के लिए तर्पण, पार्वण और श्राद्ध करते हैं। वहीं, पितरों की आत्मशांति और तृप्ति के लिए घरों में श्राद्ध कर्म भी किए जाते हैं। इस दौरान पिंडदान का भी विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार विधि.विधान से पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार जिन पूर्वजों का पिंडदान, तर्पण या श्राद्ध किया जाता है उनकी सात पीढ़ियों का उद्धार होता है पुराणों में इस संबंध में कुछ प्रमुख कथाओं का उल्लेख मिलता है
पंचांग के अनुसार इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबरए शनिवार से हो रही है। वहीं, पितृ पक्ष का समापन 10 अक्तूबर शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। मान्यता है कि सर्वपितृ अमावस्या के दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं होती है। 26 सितंबर शनिवार भाद्रपद पूर्णिमा को पूर्णिमा श्राद्ध, 27 सितंबर रविवार प्रतिपदा को प्रतिपदा श्राद्ध, 28 सितंबर सोमवार द्वितीया को द्वितीया श्राद्ध, 29 सितंबर मंगलवार तृतीयाा को तृतीया श्राद्ध, 30 सितंबर बुधवार चतुर्थी को चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध, 1 अक्तूबर गुरुवार षष्ठी को षष्ठी श्राद्ध, 2 अक्तूबर शुक्रवार को सप्तमी सप्तमी श्राद्ध, 3 अक्तूबर शनिवार को अष्टमी श्राद्ध, 4 अक्तूबर रविवार नवमी श्राद्ध, 5 अक्तूबर सोमवार दशमी को दशमी श्राद्ध, 6 अक्तूबर मंगलवार एकादशी एकादशी श्राद्ध, 7 अक्तूबर बुधवार द्वादशी द्वादशी श्राद्ध, 8 अक्तूबर गुरुवार त्रयोदशी त्रयोदशी श्राद्ध, 9 अक्तूबर शुक्रवार चतुर्दशी चतुर्दशी श्राद्ध, 10 अक्तूबर शनिवार अमावस्या सर्वपितृ श्राद्ध होगी।
एक प्रचलित कथा के अनुसार गयासुर नामक राक्षस ने भगवान विष्णु से वरदान मांगा था कि उसकी मृत्यु के बाद गया जी पूर्वजों के उद्धार के लिए पवित्र तीर्थस्थल बने। कहते हैं कि इस वजह से गया जी में पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध की परंपरा है। धार्मिक ग्रंथों मुताबिक, श्रीराम और माता सीता ने राजा दशरथ की आत्मा की शांति के लिए गया जी स्थित फल्गु नदी के किनारे पिंडदान किया था, इस वजह से भी पितृ पक्ष में गया जी में पूर्वजों के निमित्त किए जानेवाले तर्पण का विशेष महत्व है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, गया जी में भगवान विष्णु पितृ देव के रूप में विराजमान हैं।
