सूर्य देव ने किया रामलला के मस्तक पर तिलक

पीएम मोदी भी बने इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी

नई दिल्‍ली। बुधवार 17 अप्रील 2024 को पूरे देश मे रामनवमी का पर्व पूरे उत्‍साह के साथ मनाया गया। अयोध्‍या में रामलला की प्राण.प्रतिष्‍ठा के बाद यहां की रामनवी को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा गया। 500 सालों के इतिहास में पहली बार ऐसा मौका आया जब यहां विराजित रामलला का सूर्य तिलक होते हुए लोगों के साथ ही दुनिया के लोगों ने देखा। आम श्रद्धालुओं के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। उन्‍होंने असम दौरे के दौरान हवाई जहाज में बैठे-बैठे सूर्य तिलक का लाइव प्रसारण देखा। पीएम ने अपने एक्स हैंडल पर इसकी एक तस्‍वीर साझा की है। इसमें देखा गया कि कैसे वह अपना जूता उतारकर कुर्सी पर बैठे हुए हैं और उनके हाथ में टैबलेट हैं जिसके जरिये वे सीधा प्रसारण देख रहे हैं। उन्‍होंने अपने दाहिने हाथ को प्रणाम की मुद्रा में सीने से लगा रखा है।
इस तस्‍वीर को शेयर करते हुए प्रधानंत्री मोदी ने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि नलबाड़ी की सभा के बाद मुझे अयोध्या में रामलला के सूर्य तिलक के अद्भुत और अप्रतिम क्षण को देखने का सौभाग्य मिला। श्रीराम जन्मभूमि का ये बहुप्रतीक्षित क्षण हर किसी के लिए परमानंद का क्षण है। ये सूर्य तिलक विकसित भारत के हर संकल्प को अपनी दिव्य ऊर्जा से इसी तरह प्रकाशित करेगा।
प्रधानमंत्री ने रामनवमी को सुबह से राम मंदिर से जुड़े कई ट्वीट किए। इसमें उन्‍होंने लिखा. दिव्य. भव्य राम मंदिर में राम लला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद ये पहली रामनवमी है जिसमें प्रभु श्री राम के सूर्य तिलक का अलौकिक अवसर भी आया है। दुनियाभर के राम भक्तों से मेरा आग्रह है कि वे इस अद्भुत क्षण का साक्षी जरूर बनें। यह अनगिनत राम भक्तों के त्याग और तपस्या की पराकाष्ठा का परिणाम है कि आज भारतवासी इस शुभ दिन के साक्षी बने हैं। राम लला की प्राण.प्रतिष्ठा के बाद अब यह समय समर्थ,सक्षम और भव्य, दिव्य भारत के निर्माण के लिए संकल्प लेने का है।
इधर अगर अन्य जगहों की बात की जाए तो इस सूूर्य. तिलक के लाइव प्रसारण को देखने के लिए अयोध्या से दूर बसेे लोगों ने अपने-अपने टीवी को सुबह से ही चालू कर रखा था और बार-बार उनका ध्यान घडी के कांटों पर जाता था ताकि लाइव प्रसारण का समय चुक न जाए और इस क्षण को देखने से वो वंचित न रह जाएं। सच कहा जाए तो अयोध्या में विराजित रामलला का सूूर्य.तिलक को लेकर इस बात की जिज्ञासा थी कि आखिर सूूर्य. तिलक कैसे किया जाएगा। जैसे ही सूर्य.तिलक हुआ वैसे ही लोगों ने हाथ जोडकर प्रभु श्री राम को प्रणाम किया और अपने मनोकामनाओं को पूर्ण करने की प्रार्थना की।
बताया जाता है कि मंदिर प्रबंधन ने विज्ञान का इस्तेमाल कर 5.8 सेंटीमीटर प्रकाश की किरण के साथ रामलला का सूर्य तिलक किया। इस मौके पर 10 भारतीय वैज्ञानिकों की एक टीम राममंदिर में तैनात थी। दोपहर 12 बजे से लगभग 3से 3.5 मिनट तक दर्पण और लेंस का उपयोग कर सूर्य की रोशनी को रामलला की मूर्ति के ललाट पर सटीक रूप से स्थापित किया गया।

 

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