ऋतु परिवर्तन का संदेश देता है बसंत पंचमी

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि, यानी वसंत पंचमी को मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। पौराणिक कथा के अनुसार सृष्टि की रचना के बाद ब्रह्मा जी ने देखा कि सभी जीव नीरस और मौन हैं, उनमें उत्साह और चेतना की कमी है। उन्होंने भगवान विष्णु और शिव की अनुमति से अपने कमंडल के जल को मंत्रों के साथ छिड़का जिससे एक दिव्य शक्ति का प्राकट्य हुआ। देवी का स्वरूप। यह एक चतुर्भुजी, सुंदर स्त्री थीं जिनके एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, एक हाथ से “तथास्तु” मुद्रा और एक हाथ में माला थी। ब्रह्मा जी के अनुरोध पर जब उन्होंने वीणा बजाई तो “सा”  अक्षर से वर्णमाला और संगीत के सुरों का जन्म हुआ जिससे ब्रह्मांड में ध्वनि और चंचलता व्याप्त हो गई। इसी कारण ब्रह्मा जी ने उन्हें “सरस्वती” और “वीणापाणि” नाम दिया और यह दिन वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाने लगा।
23 जनवरी को बसंत पंचमी है। ये पर्व ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती के प्रकट उत्सव के रूप में मनाते हैं। यह पर्व खासकर विद्यार्थियों, कलाकारों और उन लोगों के लिए महापर्व की तरह है जो शिक्षा से संबंधित काम करते हैं। मां सरस्वती की पूजा से बुद्धि, एकाग्रता और सफलता मिलती है।
बसंत पंचमी का केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है। यह पर्व ऋतु परिवर्तन का संकेत है। सर्दी के मौसम के बाद बसंत ऋतु की शुरुआत होती है, प्रकृति में नयापन आता है। इस समय सरसों के पीले फूल खिलते हैं। पीला रंग ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता का प्रतीक है, इस दिन विशेष रूप से पीले वस्त्र पहनकर देवी की पूजा की जाती है। पीला रंग आत्मविश्वास बढ़ाता है और डिप्रेशन दूर करता है। इस दिन हल्दी.केसर का सेवन करने की परंपरा है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा में “ऊँ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जप करना चाहिए। इस मंत्र के जप से एकाग्रता और बुद्धि बढ़ती है। यह बच्चों की पढ़ाई में रुचि और बुद्धि को भी मजबूत करता है। जो लोग नई विद्या सीखना चाहते हैं या अध्ययन कर रहे हैं उन्हें वसंत पंचमी पर सरस्वती की पूजा जरूर करनी चाहिए। इस दिन से नए कोर्स की शुरुआत भी कर सकते हैं।
पूजा को विधि.विधान से करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। पीला रंग ज्ञान और ऊर्जा का प्रतीक है और माता सरस्वती को अत्यंत प्रिय है। पूजा की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। उनके साथ ही अपनी पुस्तकें, कलम और वाद्य यंत्र भी वहां रखें। पूजा की शुरुआत में मां को पीले फूलों की मालाए, पीले वस्त्र और पीले चंदन का तिलक लगाएं। भोग में मां को पीली मिठाई जैसे बेसन के लड्डू, बूंदी या पीले मीठे चावल अर्पित करें। इसके बाद धूप.दीप जलाकर कलश स्थापना करें और गणेश जी की वंदना के साथ सरस्वती पूजन आरंभ करें। पूजा के दौरान मन को शांत और एकाग्र रखना आवश्यक है। मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए मंत्रों का जाप अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। साल 2026 की बसंत पंचमी पर आप इन सरल और शक्तिशाली मंत्रों का उच्चारण कर सकते हैं। मां सरस्वती का मूल मंत्र “ऊँ ऐं सरस्वत्यै नमः” का जाप करें। मां सरस्वती से विद्या प्राप्त करने के लिए “सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने। विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोऽस्तुते।।” मंत्र का जाप करें। अपनी वाणी को प्रभावशाली बनाने के लिए  “ऊँ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः:” मंत्र का जाप करना श्रेष्ठ रहेगा।

Leave A Reply

Your email address will not be published.