राष्ट्रीय शाकद्वीपीय ब्राह्मण समाज संगठन ने की भगवान सूर्य की पूजा

नई दिल्ली। रविवार दिनांक 25 जनवरी 26 को स्थानीय अशोक नगर स्थित डी ब्लॉक शिव शक्ति दुर्गा मंदिर में अचला सप्तमी के अवसर पर राष्ट्रीय शाकद्वीपीय ब्राह्मण समाज संगठन द्वारा भगवान सूर्य की आराधना एवं पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर संगठन के अध्यक्ष डा के. के. मिश्रं एवं सभी पदाधिकारीगण उपस्थित थे।
भगवान सूर्य की पूजा समिति के सभी सदस्य एव आचार्यत्व पंडित जीवेंद्र कृष्ण शास्त्री ने की। श्री शास्त्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन धर्म में सूर्य देव को देवता के रूप में पूजा जाता है, वहीं ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहों के राजा है और ऊर्जा, स्वास्थ्य, आत्मा और पिता के कारक ग्रह हैं। जीवन का मुख्य आधार सूर्य हैं। उन्होंने कहा कि सूर्य के बिना जीवन की कल्पना इस संसार में संभव नहीं और उन्हीं सूर्य देव को समर्पित पर्व को अचला सप्तमी, माघ शुक्ल सप्तमी, रथ सप्तमी, सूर्य जयंती या आरोग्य सप्तमी भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि यह हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार सूर्य नारायण को समर्पित है और माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सूर्य नारायण की विशेष पूजा.अर्चना की जाती है और व्रत रखा जाता है। माना जाता है कि इस दिन सूर्य देव ने पूरे ब्रह्मांड को अपनी दिव्य ज्योति से प्रकाशित किया था। यह त्योहार न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि स्वास्थ्य, समृद्धि और आध्यात्मिक उत्थान के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
श्री शास्त्री ने कहा कि इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। जो भी जातक सूर्य देव की पूजा करते हैं उनके व्यक्तित्व में निखार आता है। अच्छे स्वास्थ्य, धन और समाज में सम्मान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। सूर्य पूजन करने से शारीरिक और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। नकारात्मकता दूर होती है। वहीं नित्य सूर्य उपासना करने से बुद्धि, तेज और हर ओर से सफलता मिलती है। कुंडली से सूर्य दोष दूर होता है। जीवन में शांति और सकारात्मकता आती है।
भविष्य पुराण के अनुसार एक वेश्या ने कभी कोई दान नहीं किया था। जब वह बूढ़ी हो गई तो उसने महर्षि वशिष्ठ से अपनी मुक्ति का उपाय पूछा। महर्षि वशिष्ठ ने उसे माघ मास की सप्तमी को सूर्य नारायण की आराधना और दान करने की सलाह दी। ऐसा करने से उस वेश्या को मृत्यु के बाद स्वर्ग में स्थान प्राप्त हुआ। एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण के पुत्र शाम्ब को अपनी शारीरिक शक्ति पर घमंड हो गया था। एक बार जब ऋषि दुर्वासा भगवान कृष्ण से मिलने आए तो शाम्ब ने उनके दुर्बल शरीर का अपमान किया। इससे क्रोधित होकर ऋषि दुर्वासा ने शाम्ब को कुष्ठ रोग का श्राप दे दिया। तब भगवान कृष्ण ने शाम्ब को सूर्य नारायण की उपासना करने को कहा जिसके बाद उसे कुष्ठ रोग से मुक्ति मिली।

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