झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा परीक्षा रद्द करने का मामला
रांची। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ अब कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। झारखंड हाईकोर्ट में 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा समेत अलग-अलग नियुक्तियों को रद्द किए जाने के खिलाफ अब तक कुल तीन याचिकाएं दायर हो चुकी हैं। इनमें दो याचिकाएं 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम और उसके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के खिलाफ हैं, जबकि तीसरी याचिका फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति रद्द किए जाने से संबंधित है।
11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की सफल अभ्यर्थी सोनम कुमारी ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्होंने झारखंड में नौकरी के लिए अपनी दूसरी नौकरी छोड़ दी थी। उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था और उन्होंने प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया था। इसके बाद 18 अगस्त 2026 को राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के बाद उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई। याचिका में सरकार के इस फैसले को रद्द करने की मांग की गई है। बताया गया है कि 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में कुल 342 अभ्यर्थी सफल हुए थे और वे विभिन्न पदों पर नियुक्त होकर काम कर रहे थे। सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद इन अभ्यर्थियों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। दरअसल, जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार ने कई परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है। सरकार के इस निर्णय से प्रभावित नवनियुक्त अभ्यर्थियों ने अब न्यायालय का दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया है। हाईकोर्ट में अलग-अलग अधिवक्ताओं के माध्यम से जेपीएससी परीक्षा के जरिए चयनित होकर नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार के आदेश को चुनौती दी है। इनमें अवधेश कुमार समेत अन्य की ओर से भी याचिका दायर की गई है।
