रेलवे पेपर लीक मामले में आठ आरोपियों को सज़ा सुनाई
नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अहमदाबाद स्थित अदालत के विशेष न्यायाधीश ने रेलवे पेपर लीक मामले में सोमवार को आठ आरोपियों को पांच-पांच वर्ष के साधारण कारावास और पांच-पांच लाख रुपये के जुर्माने की सज़ा सुनाई। ये सभी रेलवे के पूर्व कर्मचारी हैं और इन्हें यह सजा आपराधिक षडयंत्र, चोरी, चोरी की संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करने या रखने, अपराध के साक्ष्य को गायब करने और आपराधिक कदाचार के मामले में सुनाई गई है।
सजा पाने वालों में सुनील जसमल गोलानी तत्कालीन प्रधान लिपिक, महेंद्र मथुरा प्रसाद व्यास तत्कालीन वरिष्ठ सिफर ऑपरेटर, राजेश कुमार, कालेश्वर गोस्वामी तत्कालीन विद्युत सिग्नल अनुरक्षक, कंजारी बोर्यावी, आनंद सोमाभाई मेरैया तत्कालीन विद्युत सिग्नल अनुरक्षक, प्रकाश सीताराम दास करमचंदानी तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक (ईडी), महबूबली अब्दुलजब्बार अंसारी तत्कालीन सहायक डीजल चालक, परेश कुमार लालहीभाई पटेल तत्कालीन डीजल सहायक चालक और पप्पू बब्बा खान कांस्टेबल रेलवे सुरक्षा बल शामिल हैं।
सीबीआई ने तत्कालीन मुख्य सतर्कता निरीक्षक पश्चिम रेलवे, अहमदाबाद की शिकायत के आधार पर अगस्त 2002 में राजेश गोस्वामी, ईएसएम कर्जन.बोरियावी, पश्चिम रेलवे आणंद और रेलवे विभाग के अन्य लोगों द्वारा प्रश्नपत्र लीक करने के संबंध में मामला दर्ज किया था। दोषियों ने प्रोबेशनरी असिस्टेंट स्टेशन मास्टर के पद के लिए लिखित परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवारों से 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक की राशि वसूली थी।
