केजरीवाल की याचिका पर नहीं हो सका फैसला
नई दिल्ली। अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के विरोध में डाली गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपाकर दत्ता की वेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने पर भी विचार किया। कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल एक निर्वाचित मुख्यमंत्री है, आदतन अपराधी नहीं। लोकसभा चुनाव पांच साल बाद आता है इसलिए प्रचार में हिस्सा लेने की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि केजरीवाल को सिर्फ इस शर्त पर राहत देने पर विचार कर सकती है कि वह मुख्यमत्री के तौर पर अधिकारिक कामकाज नहीं करेंगे। जस्टिस खन्ना ने साफ किया कि यदि अंतरिम जमानत दी जाती है तो केजरीवाल अपना दफ्तर नही सभाल सकते और न ही किसी फाइल पर हस्ताक्षर कर सकते है। इसपर सिंधवी ने दावा किया कि कानून में ऐसी कोई पावंदी नहीं है। इसपर जज ने कहा कि यह शुचिता का सवाल है और केजरीवाल को अधिकारिक कामकाज की अनुमति के व्यापक प्रभाव होंगे। सिंधवी इस बात के लिए तैयार हो गए कि केजरीवाल किसी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे लेकिन यह जोडा कि वशर्ते दिल्ली के एलजी किसी अधिकारिक काम को यह कहकर ना रोकें कि इसपर सीएम का हस्ताक्षर नहीं है।
इसपर एसजी मेहता ने कहा कि कजरीवाल ऐसे मंत्री हैं जिसक पास कोई विभाग नही है। ईडी की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल के जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी के राष्टीय सयोजक को अतरिम जनानत देना नेताओं के लिए एक अलग श्रेणी बनाने जैसा होगा। पीठ ने दोनो पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अंतरिम जमानत पर आगे की सुनवाई गुरूवार या अगले सप्ताह पूरी होने पर कोई आदेश पारित करेगी। जस्टिस खन्ना ने कहा कि देखते है क्या मामला गुरूवार को खत्म हो सकता है या अगले सप्ताह सुचिवद्व हो सकता है।
