हनुमान जयंती 27 को, करें आराधना
हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल चैत्र महीने के पूर्णिमा तिथि को हनुमान जयंती का त्योहार मनाया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को श्रीराम का जन्मोत्सव रामनवमी का त्योहार होता है और उसके ठीक छह दिन बाद भगवान हनुमान का जन्मोत्सव हनुमान जयंती मनायी जाती है। इस साल हनुमान जयंती का त्योहार 27 अप्रैल मंगलवार को मनाया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं इसलिए सच्चे मन से उनकी पूजा करने वाले भक्तों के जीवन की सभी बाधाएं और कष्टों को हनुमान जी दूर कर देते हैं।
राम भक्त भगवान हनुमान जिन्हें बजरंगबली के नाम से भी जाना जाता है को कलयुग का देवता माना गया है। ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी भगवान शिव के 11वें अवतार हैं और उन्हें चिरंजीवी होने का आशीर्वाद प्राप्त है। हनुमान जी की पूजा कर उन्हें प्रसन्न करने के लिहाज से हनुमान जयंती का दिन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए इस दिन भक्तों को रामायण, रामचरित मानस, सुंदरकांड, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान बाहुक आदि का पाठ करना चाहिए।
इस बार हनुमान जयंती का त्योहार 27 अप्रैल मंगलवार को मनाया जा रहा है। मंगलवार का दिन हनुमान जी का ही दिन होता है और ऊपर से हनुमान जयंती का त्योहार यानी भक्तों के पास बजरंगबली को खुश करने का दोहरा मौका है। इसके अलावा इस दिन रात में 8 बजे तक सिद्धि योग रहने वाला है और बेहद शुभ स्वाति नक्षत्र भी। किसी भी तरह की सिद्धि प्राप्त करने और ईश्वर का नाम जपने के लिए सिद्धि योग बेहद उत्तम माना जाता है।
ऐसी मान्यता है कि हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी की पूजा.अर्चना करने से जीवन के सभी संकट और बाधाओं से छुटकारा मिलता है और सुख शांति की प्राप्ति होती है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि ग्रह का अशुभ प्रभाव हो तो उसे भी हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से शनि देव से जुड़ी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं। साथ ही निगेटिव ऊर्जा से जुड़ी परेशानियों से भी मुक्ति मिलती है।
वायुपुराण में एक श्लोक वर्णित है : आश्विनस्या सितेपक्षे स्वात्यां भौमे च मारुतिः। मेष लग्ने जनागर्भात स्वयं जातो हरः शिवः।। यानी. भगवान हनुमान का जन्म कृष्ण पक्ष चतुर्दशी मंगलवार को स्वाति नक्षत्र की मेष लग्न और तुला राशि में हुआ था। हनुमान जी बाल्यकाल से ही तरह-तरह की लीलाएं करते थे। एक दिन उन्हें ज्यादा भूख लगी तो सूर्य को मधुर समझकर उसे अपने मुंह में भर लिया, जिसके कारण पूरे संसार में अंधेरा छा गया। इसे विपत्ति समझकर इंद्र भगवान ने हनुमान जी पर व्रज से प्रहार किया। इसके प्रभाव से उनकी ठोड़ी टेढ़ी हो गई। यही वजह है कि इनका नाम हनुमान पड़ा।
