चार को देवोत्थान एकादशी के बाद शुरू होगा लग्न
कार्तिक शुक्ल एकादशी शुक्रवार यानी चार नवंबर को भगवान नारायण के चार मास के बाद निद्रा से जागृत होते ही सनातन धर्मावलंबियों के मांगलिक कार्य आरंभ हो जाएंगे। चतुर्मास के दौरान हिंदुओं के सभी मांगलिक कार्य शादी विवाह, जनेऊ, मुंडन तथा अन्य शुभ कृत्य बंद रहते हैं जो देवोत्थान एकादशी से शुरू हो जाते हैं। 17 नवंबर को सूर्य के वृश्चिक राशि में गोचर तथा 20 नवंबर को शुक्र का उदय होने के बाद लग्न मुहूर्त आरंभ हो जायेंगे।
मिथिला में 13 तो बनारसी पंचांग में 12 मुहूर्त : आचार्य राकेश झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि चतुर्मास के बाद इस वर्ष में कुल 13 शुभ लग्न मुहूर्त शेष होंगे। बनारसी पंचांग के अनुसार नवंबर में तीन और दिसंबर में भी नौ वैवाहि क लग्न हैं। वहीं, मिथिला पंचांग के मुताबिक नवंबर में सात एवं दिसंबर में छह शुभ विवाह मुहूर्त हैं। इसके बाद अगले साल 2023 में मकर संक्रांति के बाद शादी ब्याह का लग्न शुरू होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शादी के शुभ योग के लिए बृहस्पति, शुक्र और सूर्य का शुभ होना जरूरी है। रवि गुरु का संयोग सिद्धिदायक और शुभ फलदायी होते हैं। इन तिथियों पर शादी विवाह को बेहद शुभ माना गया है।
विवाह के लग्न मिथिला पंचांग के अनुसार : नवंबर 20, 21, 24, 25, 27, 28, 30 । दिसंबर : 4, 5, 7, 8, 9, 14। जनवरी : 18, 19, 22, 23, 25, 26, 27, 30 तारीख है। फरवरी : 1, 6, 8, 10, 15, 16, 17, 22, 24, 27 तारीख है। मार्च : 1, 6, 8, 9, 13, तारीख है। मई : 1, 3, 7, 11, 12, 17, 21, 22, 26, 29, 31 तारीख है। जून : 5, 7, 8, 9, 12, 14, 18, 22, 23, 25, 28 तारीख है।
विवाह के लग्न बनारसी पंचांग के अनुसार : ( नवंबर) 24, 25, 26 तारीख है। ( दिसंबर ) 2, 3, 7, 8, 9, 13, 14, 15, 16 तारीख है। (जनवरी ) 15, 17, 18, 19, 25, 26, 27, 30, 31 तारीख है। ( फरवरी ) 1, 6, 7, 8, 9, 10, 12, 13, 15, 16, 17, 18, 22, 23, 27, 28 तारीख है। ( मार्च ) 1, 5, 6, 7, 8, 9, 11, 14 तारीख है।
