कर्नाटक में उलझी नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया
नई दिल्ली। कर्नाटक भाजपा के अंदर दुविधा और जटिलता फिर एकवार सामने आ गया है। दरअसल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नलिन कुमार कतील का एक आडियो टेप वायरल हुआ है जिसमें नेतृत्व परिवर्तन की बात कही गई थी। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कथित आडियो टेप को खारिज किया है, लेकिन उसके बाद पार्टी में असंतोष और मतभेद की चर्चाएं फिर शुरू हो गई हैं। टेप में दो ऐसे नेताओं को भी बाहर का रास्ता दिखाने की बात कही गई है जो मुख्यमंत्री येदियुरप्पा की विदाई की बात से खुश थे। टेप के वायरल होने के बाद राज्य की राजनीति में पैठ रखने वाले मठ और स्वामी भी सक्रिय हो गए हैं।
बता दें कि येदियुरप्पा की ओर से अब तक यह नहीं कहा गया है कि उन्होंने इस्तीफे की पेशकश की है लेकिन माना जा रहा है कि वह मन बना चुके हैं। अटकलों के बाजार में इस बात की चर्चा है कि वह 26 जुलाई को अपने इस्तीफे की घोषणा कर देंगे। पूरी प्रक्रिया ऐसी होगी कि लिंगायत समुदाय के बीच संदेश जाए कि उनको सम्मानपूर्वक सक्रिय राजनीति से विदा किया जा रहा है। उनकी इच्छा का ख्याल रखा जा रहा है। बहरहाल जिस तरह प्रदेश अध्यक्ष कतील का कथित आडियो लीक हुआ है उसने पूरी योजना पर पानी फेर दिया है। कतील ने इस टेप की जांच कराने की मांग की है जिसमें यह भी कहा गया है कि येदियुरप्पा के साथ7साथ ग्रामीण विकास मंत्री केएस ईश्वरप्पा और वर्तमान मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार को भी हटाया जाएगा।
सूत्रों की मानें तो शेट्टार, जो खुद लिंगायत समुदाय से आते हैं के साथ-साथ ईश्वरप्पा की भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नजर है। टेप में कहा गया है कि अब जो भी आएगा वह उनके पाकेट में होगा। इसके बाद ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में उबाल शुरू हो गया है। ध्यान रहे कि 2011 में जब येदियुरप्पा को हटाया गया था तो प्रदेश में काफी विवाद खड़ा हुआ था। येदियुरप्पा ने शक्ति प्रदर्शन किया था। इस बार येदियुरप्पा राजी दिख रहे हैं तो पार्टी के अंदर से ऐसी स्थिति पैदा हो रही है जो परेशान कर सकती है। जिस लिंगायत वोट बैंक को बचाने की कोशिश हो रही है वहां अभी से चेतावनी दी जाने लगी है।
लिंगायत समुदाय के प्रभावशाली रंभापुरी मठ के स्वामी ने बयान जारी कर कहा कि येदियुरप्पा को हटाया गया तो भाजपा को उसका नुकसान झेलना पड़ सकता है। रोचक तथ्य यह है कि कांग्रेस के भी लिंगायत नेता एमबी पाटिल येदियुरप्पा के पक्ष में खड़े हो गए हैं। बताया जाता है कि टेप लीक होने के बाद अब येदियुरप्पा के पक्ष में कुछ प्रदर्शन भी हो सकते हैं। आश्चर्य नहीं कि ऐसी स्थिति में येदियुरप्पा कोई नई शर्त पेश कर दें जिसे मानना भाजपा नेतृत्व के लिए मुश्किल हो जाए। बहरहाल कर्नाटक मामले में भाजपा को बहुत संभलकर कदम उठाने पड़ेंगे।
