मनकामेश्वर मंदिर जहां होती है मनोकामना की पूर्ति

महाशिवरात्रि पर लोग शिव के अलौकिक स्थलों का दर्शन करने तो जाते हैं पर क्या कभी आपने सोचा है कि पृथ्वी पर कई ऐसे दिव्य स्थल हैं, जो विज्ञान की समझ से परे और आस्था की समझ से अपने आप में परिपूर्ण हैं। कुछ स्थानों पर विशेष मान्यताए, विशेष शक्तियों का आभा और मानसिक संतुष्टि के साथ मनोकामना पूर्ण होने का विश्वास प्रचंड होता है और लोगों को फल की प्राप्ति होती है। ऐसा ही एक अद्वितीय स्थल प्रयागराज की पावन धरा पर प्राचीनकाल से विद्यमान है जिसे लोग मनकामेश्वर मंदिर के नाम से जानते हैं।
इलाहाबाद जिला मुख्यालय से पूर्व दिशा में लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पर कैंटोनमेंट क्षे़त्र में यमुना नदी के तट पर स्थित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां जो पवित्र मन से भगवान शिव के आगे नतमस्तक होकर अपनी मनोकामना मानता है उसकी पूर्ति होती है। प्रयाग यमुना बांध के नीचे सरस्वती घाट पर किले के पश्चिम छोर पर मनकामेश्वर शिव मंदिर एवं ऋणमुक्तेश्वर मंदिर दोनो अगल-बगल में स्थित हैं। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र इस मंदिर में यूं तो हमेशा लोग आते रहते हैं पर शिवरात्रि , मास शिवरात्रि, प्रदोष एवं सोमवार को यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।
इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां स्नान करके जो भगवान शिव की पूजा करता है और दान-पुण्य करता है उसे पिशाच वाधा से भी मुक्ति मिल जाती है। मंदिर का गर्भगृह गोलाकार,गुंबदाकार में 15 फीट उंचा है। उंचे शिखर पर त्रिशुल धारण है। गर्भगृह के मध्य भाग में शिवलिंग छह इंच उंची चौकोर अरघा लाल संगमरमर पत्थर से सुसज्जित है। सामने नंदी की प्राचीन प्रमिमा अवस्थित है। चारों ओेर से लोहे का बाड़ लगा है। मुख्य मंदिर के अतिरिक्त पश्चिम दिशा में यज्ञशाला, प्रांगण में ऋणमुक्तेश्वर शिवलिंग स्थापित है। दो विशाल पीपल के पेड़ हैं जो मंदिर परिसर को अति शोभयमान और रमणनीक बनाते हैं। इसी परिसर में पुजारी आवास के अलावा सभा मंडप भी है। मंदिर परिसर में ही दो छोटे मंदिर हैं जिनमें शंकर के तीन और शिवलिंग स्थापित हैं। हनुमान जी की भी प्रतिमा भी यहां पर हैं। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का परिसर में निवास भी हैं। गर्भगृह में कालेरंग का खिवलिंग स्थापित है। मान्यता है कि यह त्रेतायुगीन शिवमंदिर भगवान सूर्य द्वारा स्थापित किया गया था इस बात का वर्णन पुराण में अंकित है।
सावन में तो यहां जलाभिषेक, रूद्राभिषेक, के साथ ही भगवान शिव का श्रृंगार देखने को लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है।मनकामेश्वर महादेव के बारे में कहा जाता है कि यहां लगातार चार सोमवार शिवलिंग के दर्शन से सारी कामनाएं पूरी हो जाती हैं। जनश्रुति है कि इस सिद्ध पीठ में रात्रि को अंधकार में शिव परिवार के तमाम सदस्य जिसमें भूत, प्रेत, पिशाच भी मंदिर परिसर में आते जाते हैं। बहुत से लोगों ने दावा किया है कि उन्होंने भूतों को यहां पहरा करते देखा है लेकिन आज तक किसी को भी ऐसी किसी प्रलयंकारी ताकतों ने परेशान नहीं किया। माना जाता है कि शिव के विश्राम के समय यहां भूत, प्रेत, पिशाच पहरा देते हैं।बाबा मनकामेश्वर के बारे में यह कहा जाता है कि जब कभी भक्त अपनी जिंदगी को हारने लगते हैं, उदास हो जाते हैं, कहीं कोई रास्ता नहीं दिखता तो ऐसे भक्त बाबा मनकामेश्वर की चौखट पर जाकर बैठ जाते हैं और जब उठते हैं तब उनकी समस्या का निदान हो चुका होता है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.