संगम नगरी में मंडराया बाढ़ का खतरा
प्रयागराज। संगम नगरी में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से खतरे के निशान की तरफ बढ़ रहा है। यहां खतरे का निशान 84.734 मीटर पर है। गंगा का जलस्तर आज शनिवार की सुबह 81.11 मीटर तक पहुंच गया, वहीं यमुना नदी भी 80.69 मीटर पर बह रही हैं।
पिछले 24 घंटे के अंदर प्रयागराज में गंगा में 38 सेंटीमीटर और यमुना में 37 सेंटीमीटर पानी बढ़ गया है। उधर समस्या अभी खत्म नहीं हुई है। कानपुर और हरिद्वार बैराज तथा नरौरा एवं माताटीला बांधों से पानी छोड़ा जा रहा है जो गंगा में मिल रहा है। इसी प्रकार केन, बेतवा, चंबल, टोंस नदियों का पानी यमुना का जलस्तर बढ़ाने के लिए आ रहा है। नदियों में जल प्रवाह पूरी रफ्तार पकड़े हुए है। 21 अगस्त की रात में गंगा का जलस्तर 80.87 तो यमुना का 80.59 मीटर तक पहुंच गया था। शहर में गंगा पथ की करीब दो किमी सड़क गंगा में समा गई है। वहीं नागवासुकि मंदिर का गंगापथ की तरफ से आवागमन भी ठप हो गया है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण दारागंज में अन्त्येष्टि की समस्या खड़ी हो गई है। अब स्थिति यह है कि लोगों को सड़क पर अन्त्येष्टि करनी पड़ रही है।
गंगा और यमुना दोनों ही नदियां उफान पर हैं। 20 अगस्त की रात फाफामऊ में गंगा 80.62 मीटर पर बह रहीं थीं। वहीं छतनाग में जलस्तर 80.17 मीटर था। 24 घंटे के अंदर फाफामऊ में 25 तो छतनाग में 52 सेंटीमीटर जलस्तर बढ़ गया। वहीं 21 अगस्त की शाम फाफामऊ में 80.87 और छतनाग में गंगा 80.17 मीटर पहुंच गईं। सबसे अधिक 56 सेंटीमीटर जलस्तर यमुना में बढ़ा है। बाढ़ कंट्रोल रूम के आंकड़े बताते हैं कि गुरुवार को नैनी में यमुना का जलस्तर 80.03 मीटर था। जबकि 21 अगस्त की रात यहां जलस्तर 80.59 दर्ज किया गया। जलस्तर में वृद्धि की रफ्तार इसी तरह से जारी रही तो संगम तट पर स्थित श्री बड़े (लेटे) हनुमान मंदिर में गंगा जी कभी भी प्रवेश कर सकती हैं। बाढ़ का पानी मंदिर के पास सड़क तक पहुंच गया है। वर्ष 2025 में सावन में मां गंगा ने पांच बार हनुमानजी को अमृत स्नान कराया था। यही स्थिति इस बार भी देखने को मिल सकती है।
