लोकतंत्र की गरिमा हुई तार-तार : वेंकैया
नई दिल्ली। सदन की कार्यवाही में लगातार हंगामा होते देख अंतत: बुधवार को सदन की कार्यवाही को अनिश्चिकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। उससे पहले विपक्ष के हंगामे के चलते राज्यसभा के सभापति एम वैंकेया नायडू भावुक हो गये। मंगलवार राज्यसभा के लिए बिल्कुल भी मंगलकारी नहीं रहा और ये दिन लोकतंत्र के काले दिवस के रूप में दर्ज हुआ, जब विपक्ष के सांसद टेबल पर चढ़ गए और काले कपड़े लहराने लगे। साथ ही जैसे ही सदन में कृषि बिल पर चर्चा शुरू हुई वैसे ही नए कृषि कानून बिल के विरोध में विपक्ष ने फाइल हवा में उछालना शुरू कर दिया। बहुत से सांसद टेबल पर खड़े हो गए। दूसरी तरफ कुछ भीड़ लगाकर सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। कुछ सदस्य टेबल के इर्द-गिर्द पालथी मार कर बैठ गए और करीब डेढ़ घंटे तक कार्यवाही बाधित करते रहे। इस तरह सदन की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा। मंगलवार की घटना को देखते हुए नायडू ने कहा कि देश का सर्वोच्च विधानमंडल जिसे लोकतंत्र का मंदिर माना जाता है उसकी गरिमा तार-तार हो गई जब कुछ सदस्य टेबल पर चढ़े। उन्होंने कहा कि ये वही टेबल है जहां अधिकारी, सदन के रिपोर्टर, महासचिव और अन्य अधिकारी बैठते हैं। ये जगह सदन की पवित्र जगह मानी जाती है।
इससे पहले जब कार्यवाही शुरू हुई कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने मिलकर अलोकतांत्रिक रवैया दिखाना शुरू किया। कांग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने राज्यसभा में फाइल उछाली। वहीं पूरा विपक्ष सदन में हंगामा खड़ा करता रहा। सदन में की गई विपक्ष के इस आचरण की काफी आलोचना भी हुई।
