बिहार : कांग्रेस की कम हिस्सेदारी पर नबी नाराज

पटना। बिहार में नयी सरकार के गठन के बाद कांग्रेस की हिस्सेदारी को लेकर पार्टी के अंदर स्थानीय स्तर से लेकर केंद्र तक विरोध के स्वर सुनाई देने लगे हैं। बिहार के कांग्रेसी नेता औऱ कार्यकर्ता पहले ही नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। अब पार्टी के केंद्रीय नेता गुलाम नबी आजाद ने भी इसपर सवाल उठा दिया है।
गुलाम नबी आजाद आजाद ने कहा कि बिहार में गैर भाजपा दलों का साथ आकर सरकार बनाना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन दुख इस बात का है कि कांग्रेस को सही हिस्सेदारी नहीं मिली है। आजाद ने कहा कि महागठबंधन में कांग्रेस को छोड़कर दूसरे घटक दलों को अच्छी संख्या में मंत्री पद मिले हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में विभागों का बंटवारा बिना किसी तर्क के किया गया औऱ दुखद औऱ हैरान कर देने वाली बात ये है कि है कांग्रेस से किसी ने बाजिव हक के लिए दबाव नही बनाया।
आजाद ने कहा कि कांग्रेस को विधायकों की संख्या के आधार पर मंत्रियों के कम से कम चार पद मिलने चाहिए थे। अगर ऐसा हुआ होता तो पार्टी को समाज के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का मौका मिलता। बिहार कैबिनेट में सही हिस्सेदारी नहीं मिलने के कारण कांग्रेस सवर्ण वर्ग से कोई मंत्री नहीं बना सकी। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कांग्रेस की ओर से जिसने भी नयी सरकार में हिस्सेदारी की बात की थी उसे विधानसभा में अपने संख्याबल के आधार पर अपनी हिस्सेदारी की जानकारी होनी चाहिए थी। अगर ऐसा होता तो हमारे चार मंत्री बनते और हम सवर्ण तबके को मंत्री बना पाते।
आजाद ने कहा. राजद के पास 79 विधायक हैं और उसे 17 मंत्री पद मिल गये। नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के पास एक निर्दलीय समेत कुल 46 विधायक हैं और उसके 13 मंत्री बनाये गये हैं। यहां तक कि जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवामी मोर्चा यानि हम के सिर्फ चार विधायक हैं और उसे भी एक मंत्री पद दिया गया। फिर 19 विधायकों वाली कांग्रेस को सिर्फ दो मंत्री पद ही क्यों मिले।

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