प्रशांत किशोर ने सीएम नीतीश को लिया निशाने पर
नई दिल्ली। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार की दूसरे नेताओं से मुलाकातों पर निशाना साधते हुए कहा कि चार नेताओं से मिलने से अथवा उनके साथ चाय पीने से विपक्ष की एकजुटता साबित नहीं होती है। श्री किशोर ने कहा कि कि नीतीश कुमार के दिल्ली दौरे को लेकर जबरदस्ती मायने निकाले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना का नेशलन पॉलिटिक्स पर कोई असर नहीं दिख रहा है।
श्री किशोर ने शनिवार को एक इंटरव्यू में कटाक्ष करते हुए कहा कि हमने बिहार में कई गठजोड़ बनते और बिखरते देखे हैं। केवल एक कड़ी नहीं टूटती और वह कड़ी है सीएम की कुर्सी और नीतीश कुमार की। जिस तरह से नीतीश पहले भाजपा के साथ थे, फिर उसे छोड़ा, दोबारा साथ आए, दोबारा छोड़ा। इस दौरान सीएम की कुर्सी और नीतीश कुमार जी के बीच का कडी नहीं टूटी। उन्होंने कहा कि वे कुर्सी से चिपके हुए हैं। ऐसी बाजीगरी नीतीश कुमार ही कर सकते हैं। कोई भी गठबंधन हो, कैसी भी स्थिति हो, यह रिश्ता नहीं टूटता है। फेविकोल कपंनी को उन्हें अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाना चाहिए।
प्रशांत किशोर ने बिहार में नीतीश के बीजेपी को छोड़ने के फैसले पर कहा कि यह राज्य आधारित घटना है। इसका दूसरे राज्यों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में पहले महागठबंधन की सरकार थी, अब एनडीए की सरकार है। उसका बिहार पर कोई असर नहीं पड़ा।
विदित हो कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार अपने दिल्ली दौरे के दौरान 5 सितंबर से लेकर 7 सितंबर तक विपक्ष के 10 से ज्यादा नेताओं से मुलाकात की। इसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी, लालू यादव, जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी, आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, उनके पिता मुलायम सिंह यादव, सीपीआई महासचिव डी राजा, सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी, इनेलो के ओम प्रकाश चौटाला, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार और भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य शामिल हैं।
