रक्षा संबंधों को मज़बूत करने को सेना प्रमुख अल्जीरिया रवाना
नई दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा पर रविवार को अल्जीरिया के लिए रवाना हुए। यह यात्रा भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान की हाल की यात्राओं के तुरंत बाद हो रही है। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत बनाना है। इस यात्रा से विदेशों में भारत की रणनीतिक गतिविधियों को मज़बूत करने में सेना की बढ़ती भूमिका के महत्व का पता चलता है।
रक्षा मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि 25 से 28 अगस्त तक चलने वाली सेना प्रमुख की यात्रा का उद्देश्य भारत और अल्जीरिया के बीच रक्षा और सुरक्षा संबंधों को मज़बूत करना है जिसमें आपसी सैन्य सहयोग को मज़बूत करना, क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर दृष्टिकोण साझा करना और रक्षा औद्योगिक सहयोग के अवसर तलाशना शामिल है। जनरल द्विवेदी की यात्रा से भारत.अल्जीरिया संबंधों में नई गति आने, गुटनिरपेक्षता और दक्षिण.दक्षिण सहयोग के साझा मूल्यों को सुदृढ़ करने तथा दोनों सेनाओं के बीच दीर्घकालिक रक्षा और सुरक्षा सहयोग के मजबूत होने की उम्मीद है। इस यात्रा के दौरानए जनरल द्विवेदी अल्जीरियाई के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ उच्च.स्तरीय बैठकें करेंगे। इनमें जनरल सईद चानेग्रिहा, राष्ट्रीय रक्षा मंत्री के मंत्री प्रतिनिधि और पीपुल्स नेशनल आर्मी के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल मोस्तफा स्माली और अल्जीरिया में भारतीय राजदूत स्वाति कुलकर्णी शामिल होंगी। वह स्कूल ऑफ कमांड एंड मेजर स्टाफ, टैमेंटफॉस्टय चेरशेल मिलिट्री अकादमी जैसे प्रमुख सैन्य संस्थानों का भी दौरा करेंगे और शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
इस यात्रा से पहले, भारतीय रक्षा उद्योगों ने 30 जुलाई से एक अगस्त तक अल्जीयर्स में आयोजित रक्षा संगोष्ठी में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया था। अल्जीरिया और भारत की सेना करीब-करीब एक जैसे उपकरणों का इस्तेमाल करती हैं जिससे भारत परिचालन विशेषज्ञता साझा करने, रखरखाव तथा प्रशिक्षण सहायता प्रदान करने और रक्षा प्रौद्योगिकियों में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अच्छी स्थिति में है। दोनों पक्ष रक्षा उद्योग, विशेष रूप से आधुनिकीकरण, रसद और उपकरण सहायता के क्षेत्रों में साझेदारी के अवसरों का पता लगाने पर भी चर्चा करेंगे। जनरल द्विवेदी बातचीत के दौरान आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने के भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण को भी साझा करेंगे और क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। इससे दोनों सेनाओं के बीच विश्वास, अंतर.संचालन और व्यावहारिक सहयोग को बढावा मिलने की उम्मीद है।
