मतदाता सूची मामले पर जिला अध्यक्षों की आपत्तियां नियमानुसार नहीं
नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने रविवार को कांग्रेस पार्टी से आग्रह किया कि वह बिहार में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाये जाने के आरोपों के संबंध में अपने जिला अध्यक्षों से निर्धारित प्रारूप में आपत्तियां दर्ज करायें।
कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने आज एक संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि बिहार में 89 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। कांग्रेस ने यह भी कहा है कि इसके खिलाफ बिहार में उसके जिला अध्यक्षों ने अधिकारियों को पिछले एक.दो दिन में पत्र दिए हैं। इसके जवाब में आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिहार में कांग्रेस के जिला अध्यक्षों द्वारा जिला चुनाव अधिकारियों को प्रस्तुत की गईं आपत्तियां निर्धारित प्रारूप में नहीं है। जिलाधिकारी उन्हें उचित कार्यवाही के लिए संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को भेज रहे हैं।
चुनाव आयोग ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि यह अपेक्षित है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी जिला कांग्रेस समिति के अध्यक्षों से निर्वाचन पंजीकरण नियम 1960 के नियम 2003 बी के अंतर्गत अपने विवेका अनुसार निर्धारित शपथ पत्र लेने के बाद करीब 89 लाख मतदाताओं के नाम काटने की प्रक्रिया पर समुचित निर्णय लेंगे। चुनाव आयोग ने कहा है कि उसके निर्देशों के अंतर्गत कोई भी नाम काटे जाने की आपत्ति निर्वाचन पंजीकरण नियम 1960 के नियम 13 के तहत सिर्फ फॉर्म 07 भर कर दी जा सकती है। आयोग ने कहा है कि बिहार में मतदाता सूची की विशेष ग्रहण पुनरीक्षण के लिए राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त किए गए बूथ स्तरीय एजेंट लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के अनुसार घोषणा पत्र के साथ निर्धारित प्रारूप भरकर अपनी आपत्ति और दावे प्रस्तुत कर सकते हैं।
आयोग ने उच्चतम न्यायालय के 22 अगस्त के अंतरिम आदेश का उल्लेख करते हुए कहा है कि बिहार में मान्यता प्राप्त छह राष्ट्रीय और छह राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के द्वारा राज्य की नयी सूची के मसौदे में कोई भी गलत नाम की जानकारी संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी को निर्धारित प्रारूप में जमा करनी है।
