जासूसी कराने का इतिहास कांग्रेस का : रविशंकर
नई दिल्ली। पेगासस स्पाइवेयर के माध्यम से विपक्षी नेताओं की कथित जासूसी कराने के कांग्रेस के आरोपों को भाजपा ने सिरे से खारिज कर दिया है। पूर्व आइटी मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस के आरोपों को बेबुनियाद और स्तरहीन करार दिया। उन्होंने संसद के मानसून सत्र के ठीक पहले बिना किसी ठोस सबूत पेगासस का मुद्दा उछाले जाने के पीछे गहरी साजिश की आशंका जताई।
रविशंकर प्रसाद ने पेगासस स्पाइवेयर के माध्यम से जासूसी कराने के आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि जिस डाटा के आधार पर जासूसी के आरोप लगाए जा रहे हैं उसे जारी करने वाले ने ही साफ कर दिया कि डाटा में मोबाइल नंबर होने मात्र से उसकी पेगासस से जासूसी की बात साबित नहीं होती है। इसके साथ ही उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले पेगासस के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वाट्सअप की ओर से पेश हुए वकील कपिल सिब्बल द्वारा किए गए दावे का भी हवाला दिया। उनके अनुसार सुप्रीम कोर्ट में वाट्सअप ने साफ कर दिया था कि पेगासस स्पाइवेयर के माध्यम से उसके सिक्योरिटी सिस्टम के ध्वस्त करना कतई संभव नहीं है।
रविशंकर प्रसाद ने पेगासस का मुद्दा उठाने के समय और उसमें शामिल संस्थाओं की पहले संदिग्ध भूमिका का हवाला देते हुए इसके पीछे गहरी साजिश की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि इस डाटा को जारी करने में द वायर और एमनेस्टी इंटरनेशनल की मुख्य भूमिका रही है। द वायर की वेबसाइट पर डाली गईं कई स्टोरी गलत साबित हो चुकी हैं वहीं एमनेस्टी इंटरनेशनल संस्था लगातार भारत को निशाना बनाती रही है। उन्होंने कहा कि संसद के मानसून सत्र के ठीक एक दिन पहले बिना किसी आधार पर इसे मुद्दा बनाकर भारत की छवि धूमिल करने और सरकार को बदनाम करने की साजिश की गई है।
रविशंकर के अनुसार पंजाब और राजस्थान में अंदरूनी संकट से गुजर रही कांग्रेस एक आधारहीन रिपोर्ट के आधार पर सरकार पर विपक्षी नेताओं की जासूसी कराने का आरोप लगा रही है, जबकि हकीकत यह है कि खुद कांग्रेस का विपक्षी नेताओं की जासूसी कराने का पुराना इतिहास रहा है। राजस्थान में खुद कांग्रेस के विधायक फोन टैपिंग किए जाने का आरोप लगा रहे हैं। इसके पहले पूर्व राष्ट्रपति और तत्कालीन वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लिखित शिकायत कर गृहमंत्री पी चिदंबरम के खिलाफ अपने दफ्तर में बग लगाकर जासूसी किए जाने की शिकायत की थी। इसी तरह से 2013 में संप्रग सरकार के दौरान हजारों लोगों के फोन टैपिंग की खबरें आ चुकी हैं।
