पेगासस जासूसी मामले में विशेषज्ञ कमेटी गठित करेगी सरकार
नई दिल्ली। पेगासस जासूसी मामले की स्वतंत्र जांच को लेकर दायर याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से हलफनामा दाखिल करके जानकारी दी गई है कि वह इजरायली पेगासस स्पाइवेयर के साथ भारतीय नागरिकों की कथित जासूसी के सभी पहलुओं की जांच करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति का गठन करेगी।
सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई मंगलवार को भी जारी रखेगा। सुप्रीम कोर्ट ने चयन समितियों की सिफारिशों के बावजूद ट्रिब्यूनल में नियुक्ति करने के लिए केंद्र को 10 दिनों का समय दिया है। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पेगासस जासूसी के आरोपों को लेकर स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिकाएं अटकलोंए अनुमानों और मीडिया में आई अपुष्ट खबरों पर आधारित हैं। विशेषज्ञों का एक समूह उठाए गए सभी मुद्दों की जांच करेगा।
प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ के समक्ष दायर हलफनामे में सरकार ने कहा कि केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव पहले ही कथित पेगासस जासूसी मुद्दे पर संसद में उसका रुख स्पष्ट कर चुके हैं। हलफनामे में कहा गया है कि उपर्युक्त याचिका और संबंधित याचिकाओं के अवलोकन भर से यह स्पष्ट हो जाता है कि वे अटकलों, अनुमानों तथा अन्य अपुष्ट मीडिया खबरों तथा अपूर्ण या अप्रमाणिक सामग्री पर आधारित हैं। हलफनामे में कहा गया कि कुछ निहित स्वार्थों द्वारा दिए गए किसी भी गलत विमर्श को दूर करने और उठाए गए मुद्दों की जांच करने के उद्देश्य से विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया जाएगा। संक्षिप्त सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि वह दिन के अंत में इसे देखेगी।
केंद्र सरकार के आईटी मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि भारत में किसी की गैर कानूनी तरीके से जासूसी नहीं की गई। पेगासस को लेकर लगाए जा रहे सारे आरोप गलत हैं। फिर भी अगर लोगों के मन में कोई शंका है तो सरकार एक एक्सपर्ट कमेटी बनाकर आरोपों की जांच को तैयार हैं। कोर्ट ही उस कमेटी का दायरा तय कर दे। पत्रकार एन राम की तरफ से वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि हम सिर्फ दो बातें जानना चाहते हैं जिसका सरकार जवाब नहीं दे रही है। पहला ये कि क्या सरकार ने पेगासस का इस्तेमाल किया। दूसरा ये कि क्या जासूसी नियम के मुताबिक अधिकारियों की इजाजत के बाद किया गया। सिब्बल के मुताबिक सरकार इन सवालों से बच रही है।दूसरे याचिकाकर्ताओं ने कहा की सरकार की कमेटी में निष्पक्षता नहीं रहेगी इसलिए सुप्रीम कोर्ट को कमेटी बनाकर जांच की निगरानी करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि भारत सरकार ने पेगासस के जरिए देश के 122 लोगों के खिलाफ जासूसी की। ये उनके अधिकारों का हनन है।
विदित हो कि शीर्ष अदालत ने 10 अगस्त को कुछ याचिकाकर्ताओं द्वारा सोशल मीडिया पर जासूसी मुद्दे पर समानांतर कार्यवाही और बहस को अपवादस्वरूप लेते हुए कहा था कि अनुशासन कायम रखा जाना चाहिए और याचिकाकर्ताओं को व्यवस्था में थोड़ा भरोसा होना चाहिए।
