कम मार्जिन वाली सीटों पर होगा कांटे की टक्कर

नई दिल्ली। पौराणिक इतिहास इस बात का साक्षी है कि जलकर राख वही होता है जो किसी के अपनत्व और भरोसे का खूनी होता है। न तो वरदायी देवता कभी जला है और  न ही भस्म बना है। इस बार के चुनाव मे भी वही सत्ता के सिहासन पर विराजमान होंगे जिसनेे जनता रूपी वरदायी देवता की कभी उपेक्षा नही की है। देश मे लोकसभा के चार चरण के चुनाव सपन्न हो चुके है और अब पांचवे चरण के चुनावी तैयारी को लकर राजनेताओं ने चौसर बिछाने शुरू कर दिए है। पर इस चौसर में किसकी गोटी लाल होगी यह तो आनेवाला वख्त बताएगा पर इतना तो तय माना जा रहा है कि जिन सीटों पर यह चुनाव होंगे वहां कांटे का मुकाबला देखने को मिलेगा। खासकर उन सीटों पर जो कम मार्जिन वाली हैं।
कम मार्जिन वाली सीटों की बात की जाए तो हम पाते हैैं कि मोहनलालगंज,  अमेठी,  फैजाबाद,  बांदा और कौशांबी में भगवा खेमा एड़ी चोटी का जोर लगा रखी है। इस चरण की 14 लोकसभा सीटों में 71 विधानसभा सीटें हैं। इनमें से 41 सीटों पर भाजपा का और 30 सीटों पर विपक्ष का कब्जा है। इसलिए लड़ाई अपेक्षाकृत कठिन होने के आसार हैं। माना जा रहा है कि यदि पिछले चरणों की तरह पांचवें चरण में भी मतदान प्रतिशत में गिरावट रही तो इसका खामियाजा भाजपा को उठाना पड़ सकता है। इसलिए भाजपा के सामने मतदान बढ़ाना ही एक ऐसा विकल्प है जिसके जरिए कम अंतर वाली सीटों पर कब्जा बरकरार रखा जा सके। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने वोट प्रतिशत बढ़ाकर ही इन सीटों पर जीत दर्ज की थी। 2009 में हुए लोकसभा चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि उस चुनाव में मतदान का प्रतिशत काफी कम रहा है। इसका असर कई सीटों पर पड़ा। जिसका लाभ सपा,  बसपा और कांग्रेस को मिला था। उस चुनाव में कई सीटों पर सपा ने बाजी मारी थी। अपनी परंपरागत सीट रायबरेली और अमेठी पर कब्जा बरकार रखने के साथ कांग्रेस ने भी फैजाबाद, गोंडा,  बाराबंकी और झांसी में जीत दर्ज कर ली थी। वहीं, बसपा के खाते में हमीरपुर लोकसभा सीट गई थी। पांचवें चरण में बसपा को भी सुरक्षित सीटों से बड़ी आस है।

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