बच्चों में जगा रहे वैदिक ज्ञान की अलख
नई दिल्ली। वैदिक ज्ञान भारतीय संस्कृति का वह विशाल और समग्र ज्ञान है जो वेदों, उपनिषदों, रामायण, महाभारत और पुराणों जैसे धार्मिक ग्रंथों में समाहित है। यह मानव जीवन के आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक पहलुओं को समझने तथा जीवन को संतुलित व समृद्ध बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है। इसमें न केवल धर्म और आध्यात्मिकता है बल्कि विज्ञान, चिकित्सा, ज्योतिष और योग जैसे व्यावहारिक और वैज्ञानिक विषय भी शामिल हैं जो प्राचीन भारतीय सभ्यता के गौरव को दर्शाते हैं।
वैदिक ज्ञान मानव जीवन के सभी पहलुओं शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक के विकास का मार्ग दिखाता है। यह जीवन के नियमों, मूल्यों और सिद्धांतों का अध्ययन कराता है जिससे एक संतुलित और समृद्ध जीवन जीने में मदद मिलती है। प्राचीन भारतीय संस्कृति की जड़ों को समझने और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में वैदिक ज्ञान के अनुसंधानों को जानने के लिए भी यह महत्वपूर्ण है।
इसी उद्देश्य को लेकर मयूर विहार फेज थ्री के पॉकेट ए-वन स्थित तिरंगा इन्कलेव के प्राचीन गौरी शंकर मंदिर में पुजारी श्री बिजेंद्र मिश्र द्वारा बच्चों में सनातन के प्रति ज्ञान के साथ ही संस्कार व मंत्रोच्चारण की शिक्षा दी जा रही है। प्रत्येक रविवार को यहां चलाए जा रहे सत्र मे बच्चे आते हेें और मंत्रो कं उच्चारण का ज्ञान प्राप्त करते है। मंत्रोच्चार में भगवान गणेश का मंत्र, शिव का मंत्र, गायत्री मंत्र आदि का उच्चारण जब यहां बच्चे करते हैं तो पूरा मंदिर गुंजायमान हो जाता है। पुजारी श्री मिश्रा बताते हैं कि बच्चों में प्रारंभिक ज्ञान का होना नितांत आवश्यक है जिसमें संस्कृत जिसे आर्यो की भाषा कही जाती है को जानना जरूरी होता है। कहा भी गया है “संस्कृत पठित्वा आर्यानां सभ्यतां जानासि।” भारत की पहचान है। वो कहते हैं कि जब हम किसी पूजा का संकल्प लेतें हैं तो संकल्प के मंत्र में भी आर्यावर्त देशेे शब्द का प्रयोग किया गया है। भारत को आर्यावर्त भी कहा गया है। श्री मिश्रा बताते हैं कि मंत्र की शक्ति को मापा नहीं जा सकता। भगवान के अधीन मंत्र नहीं है बल्कि मंत्र के अधीन भगवान है जिसे हम उच्चारण कर उनका आहवान करते है और उनकी कृपा प्राप्त करते है। वैदिक ज्ञान प्राप्ति के लिए संस्कृृत भाषा का ज्ञान होना जरूरी है। इसी उद्देश्य से हम पहले बच्चों को संस्कृत में मंत्रों का उच्चारण सिखाते हैं ताकि आगे उन्हें किसी प्रकार की कठिनाइयों का सामना न करना पडे।
