कोविशील्ड और कोवैक्सीन के उत्पादन में हो रही वृद्धि : मनसुख

नई दिल्ली। सरकार ने मंगलवार को संसद को बताया कि कोरोना रोधी वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन की उत्पादन क्षमता में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दिसंबर तक कोविशील्ड की मासिक उत्पादन क्षमता बढ़कर 12 करोड़ डोज और कोवैक्सीन की 5.8 करोड़ डोज हो जाएगी। इसके अलावा रेमडेसिविर की उत्पादन क्षमता भी अप्रैल माह के मध्य तक 38.8 लाख शीशी प्रति माह थी जो जून से बढ़ कर 122.49 लाख शीशी प्रति माह हो गई।
राज्यसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने एक लिखित जवाब में बताया कि उत्पादकों की तरफ से बताया गया है कि कोविशील्ड की उत्पादन क्षमता मौजूदा 11 करोड़ डोज प्रतिमाह से बढ़कर 12 करोड़ डोज से अधिक और कोवैक्सीन की 2.5 करोड़ डोज से बढ़कर 5.8 करोड़ डोज प्रतिमाह होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि देश में अब तक टीकों की 47 करोड़ डोज दी गई हैं और केंद्र सरकार पूरे देश के जल्द से जल्द टीकाकरण का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि चार और भारतीय कंपनियों के अक्टूबर.नवंबर तक कोविड रोधी टीकों का उत्पादन शुरू करने की उम्मीद है जिससे टीकाकरण अभियान में तेजी आएगी।
निजी अस्पतालों द्वारा उपयोग नहीं की गई सात से नौ फीसद डोज का भी सरकारी टीकाकरण केंद्रों में उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में बायोलॉजिकल ई और नोवाद्दटस के टीके भी बाजार में उपलब्ध होंगे । वहीं जायडस कैडिला को जल्दी ही एक विशेषज्ञ समिति से आपात उपयोग की अनुमति मिल जाएगी। स्पूतनिक टीका भी उपलब्ध है और इसका उत्पादन शुरू हो गया है। 62.54 फीसद रजिस्ट्रेशन ऑन-साइट मांडविया ने कहा कि कोरोना टीकाकरण के लिए 62.54 फीसद रजिस्ट्रेशन ऑन.साइट किए गए और मौके पर जाकर 77 फीसद टीके लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि बिना फोटो पहचान पत्र वाले 4.35 लाख से ज्यादा लोगों को भी विशेष अभियान चलाकर अभी तक टीके लगाए गए हैं।
मांडविया ने एक प्रश्न के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह भी बताया कि किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में एंटीवायरल दवा रेमडेसिविर की कमी नहीं है। दूसरी लहर के दौरान अप्रैल और मई 2021 में रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग अचानक बढ़ गई और बाजार में इसकी किल्लत हो गई। रेमडेसिविर का उत्पादन बढ़ाने के लएि लाइसेंसधारी निर्माताओं के 40 नए उत्पादन स्थलों को शीघ्रता से मंजूरी दी गई। इस समय देश में हर महीने रेमडेसिविर की उत्पादन क्षमता बढ़कर 122.49 लाख शीशी हो गई।

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