प्रख्यात संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुभाष कश्यप का निधन
नई दिल्ली।जाने.माने संविधान विशेषज्ञ एवं लोक सभा के पूर्व महासचिव पद्य भूषण डॉ सुभाष कश्यप का गुरुवार को हृदय गति रुकने के कारण यहां उनके निवास पर निधन हो गया। वह 97 वर्ष के थे। बिजनौर में जन्मे और इलाहाबाद में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले डॉ.कश्यप 1984 में लोक सभा के महासचिव बने थे। वह इस पद पर 1990 तक रहे। वह संविधान विशेषज्ञ एवं संसदीय मामलों के ज्ञाता थे। उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं।
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने डॉ. कश्यप के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।श्री बिरला ने एक संदेश में कहा कि डॉ. कश्यप संविधान और संसदीय व्यवस्था के जीवंत विश्वकोश थे। लोकसभा के महासचिव के रूप में उनकी दीर्घ और विशिष्ट सेवाएं, संवैधानिक विषयों पर उनका गहन अध्ययन तथा उनकी सौ से अधिक पुस्तकें लोगों का मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं। संसद, संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की समझ को जन-जन तक पहुंचाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन की प्रेरणाओं से निर्मित उनका जीवन राष्ट्रसेवा, ज्ञान और नैतिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण था। चाहे संसदीय प्रक्रियाओं का विकास हो, पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने का कार्य हो या संवैधानिक सुधारों पर विचार-विमर्श, डॉ. कश्यप ने हर भूमिका में अपनी विद्वता और दूरदृष्टि की अमिट छाप छोड़ी। इस विद्वता के कारण उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से भी नवाजा गया।
लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि उनका देहावसान भारतीय संसदीय लोकतंत्र, संवैधानिक विमर्श और सार्वजनिक जीवन के लिए गहरी क्षति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार और उनके असंख्य प्रशंसकों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति दें।
