25 सितंबर को है महालया , जानें इसका महत्व
हिंदू शास्त्रों के अनुसार महालया और पितृ पक्ष अमावस्या एक ही दिन मनाई जाती है। इस बार यह 25 सितंबर को मनाया जा रहा है। माना जाता है कि महालया के दिन ही हर मूर्तिकार मां दुर्गा मां दुर्गा की आंखें तैयार करता है। इसके बाद से मां दुर्गा की मूर्तियों को अंतिम रूप दिया जाता है।
नवरात्रि की शुरुआत से एक दिन पहले महालया को ख़ास महत्वपूर्ण माना जाता है। आज के दिन को दो प्रमुख कारणों से ख़ास महत्वपूर्ण माना जाता है। पहला तो ये की, इस दिन ही पितृपक्ष की समाप्ति होती है और दूसरी तरफ देवी माँ के आगमन की तैयारी में भक्त जुट जाते हैं। इस दिन से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार पार्वती माता जिन्हें दुर्गा मां का ही स्वरूप माना जाता है कैलाश पर्वत छोड़कर अपने पुत्रों से मिलने पृथ्वी लोक की तरफ प्रस्थान करती हैं। इसलिए लोग देवी मां को उनके घर पधारने का निमंत्रण देते हैं। विभिन्न मंत्रों और भजन के द्वारा दुर्गा मां को भक्त आज अपने घर आने का निमंत्रण देते हैं। इस दिन को खासतौर से बंगाली समुदाय के लिए विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। बंगाल में नवरात्रि से पहले देवी माँ की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं और इसी दिन देवी के सभी प्रतिमाओं के नेत्र को आखिरी प्रारूप दिया जाता है।
पौराणिक धार्मिक मान्यता के अनुसार महालया के दिन ही देवी दुर्गा ने महिषासुर सहित तमाम असुरों का अंत किया था। इसलिए भी इस दिन को विशेष महत्व दिया जाता है। बंगाल, बिहार और असम में देवी मां की प्रतिमा स्थापित करने का रिवाज है, इसलिए इस दिन विशेष रूप से ही नवरात्रि की धूम शुरू हो जाती है। नवरात्रि के दौरान इन राज्यों में विशेष रूप से देवी मां का असुरों का वध करते हुए कथा का नाट्य रूपांतरण भी किया जाता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार जब रावण ने सीता माता का हरण किया था तो श्री राम ने रावण से युद्ध आरंभ करने से पहले आज के दिन ही देवी मां की पूजा शुरू की थी। नौ दिनों तक देवी मां की पूजा करने के बाद दसवें दिन भगवान् श्री राम ने रावण का वध किया था। इसलिए दसवें दिन विजयादशमी का त्यौहार मनाया जाता है।
