गायत्री मंत्र और इसकी महिमा
प्राय: लोग गायत्री मंत्र का जाप कर लेते हैं। किसी भी पूजा पाठ में जब हम आसन शुद्वि आादि कर लेते हैं तो गाय़त्री मंत्र का जाप पंडितो द्वारा कराया जाता है। पर क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर ये गायत्री मंत्र है क्या। आखिर पंडित जी ऐसा क्यों कराते हैं। बहुत सारे ऐसे लोग है जो इसके बारे में जानने की कोशिश भी नहीं करते। पर सच कहा जाए तो इस मंत्र में एक अद्भूत शक्ति है जिसके जाप से मनुष्य न केवल अंतर्मन से मजबूत होता है बल्कि जिंदगी में आनेवाले कई वाधाओं से अपने को सुरक्षित कर लेता है।
आइए जानते हैं कि इस मंत्र में क्या है। ॐ भूर्भवरू स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात का अर्थ है कि हम उस सृष्टिकर्ता, सभी दुखों को दूर करने वाले और प्रकाशमान परमात्मा के तेज का ध्यान करते हैं जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे। यह मंत्र बुद्धि को सही राह पर ले जाने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने में मदद करता है। मंत्र का विस्तार से अर्थ की बात की जाए तो ॐ – यह ब्रह्मांडीय चेतना और परम ब्रह्म का प्रतीक है जो सभी का रक्षक है। भूर्भुवः स्वः:- – यह तीनों लोकों, पृथ्वी लोक, भुवर्लोक, अन्तरिक्ष और स्वर्लोक का प्रतीक है जो परमात्मा के व्यापक रूप को दर्शाता है। तत्सवितुर्वरेण्यं- उस सविता यानी सूर्य के वरेण्यं यानी श्रेष्ठ और पूजनीय प्रकाश का ध्यान करते हैं। भर्गो देवस्य धीमहि- भर्गो अर्थात तेजस्वी, देवस्य अर्थात ईश्वर के धीमहि यानी हम ध्यान करते हैं। धियो यो न: प्रचोदयात- हम उस परमात्मा से प्रार्थना करते हैं कि वह हमारी धियो यानी बुद्धि को यो न:- यानी हमारे अंदर प्रचोदयात यानी सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें। गायत्री मंत्र का अर्थ है कि हम उस सृष्टिकर्ता, सभी दुखों को दूर करने वाले और प्रकाशमान परमात्मा के तेज का ध्यान करते हैं जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे। यह मंत्र बुद्धि को सही राह पर ले जाने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने में मदद करता है। मंत्रों में इसे सर्वाधिक शक्तिशाली मंत्र कहा गया है।
अब सवाल उठता है कि इस मंत्र का जाप कब करना है तो इस संबंध में कहा गया है कि पहला सूर्योदय से पूर्व यानी सुबह सूरज निकलने से पहले, दूसरा दोपहर के समय और तीसरा शाम को सूरज ढलने से पहले। गायत्री मंत्र का रोजाना जाप करने से मेमोरी और कंसंट्रेशन पावर में भी पॉजिटिव इंप्रूवमेंट देखने को मिल सकता है। एक स्टडी के मुताबिक जो लोग रोज किसी भी तरह का मंत्रोच्चार करते हैं उनकी ध्यान शक्ति और मेमोरी तुलनात्मक रूप से शार्प होती है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करे तो उसे निश्चित रूप से सौभाग्य, उज्ज्वल भविष्य, स्वास्थ्य, धन, सुख और जीवन की सभी अच्छी चीजें प्राप्त होंगी ऐसा माना गया है।
दूसरा सवाल है इस मंत्र का जाप कब नहीं करना चाहिए तो इस संबंध में कहा गया हे कि गायत्री मंत्र का जाप मांस, मछली या शराब के सेवन के बाद नहीं करना चाहिए क्योंकि यह अपवित्र अवस्था होती है और ऐसे में जाप करने से नकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। एक प्रश्न लोगों के मन में और उठता है कि आखिर गायत्री हैं कौन तो मान्यता है कि गायत्री देवी भगवान ब्रह्मा की दूसरी पत्नी हैं और उन्हें देवताओं का आराध्य माना जाता है। देवी गायत्री को ज्ञान, पवित्रता और सदाचार की प्रतीक माना जाता है और वे वेद माता भी कहलाती हैं। गायत्री को समस्त ज्ञान की देवी माना जाता है इसलिए उन्हें “ज्ञान गंगा” भी कहते हैं। गायत्री मंत्र की महिमा इतनी अधिक है कि इसके बिना कोई भी पूजा या यज्ञ पूरा नहीं होता है।
(पं. बिजेंद्र मिश्र)
