छोटा राजन ने दी कोरोना को मात

तिहाड़ जेल में किया गया शिफ्ट

नई दिल्ली। अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन ने कोरोना से जंग जीत ली है। उसे मंगलवार को एम्स से डिस्चार्ज कर वापस तिहाड़ जेल भेज दिया गया। छोटा राजन को तिहाड़ की जेल नंबर 2 में कड़े सुरक्षा घेरे में रखा गया है। कोरोना होने पर राजन का 22 अप्रैल से जेल के अस्पताल में इलाज चल रहा था। हालत बिगड़ने पर उसे 25 अप्रैल को एम्स शिफ्ट किया गया था।
इलाज के दौरान 7 मई को छोटा राजन की मौत की अफवाह उड़ी थी। इसके बाद उसी दिन एम्स ने इसका खंडन करते हुए कहा था कि वह न सिर्फ जिंदा है बल्कि रिकवर भी कर रहा है। मौत की अफवाह उड़ने के 4 दिन बाद अब राजन कोरोना से जंग जीतकर वापस आ गया है।
विदित हो कि छोटा राजन का असली नाम राजेंद्र सदाशिव निखलजे है। उसका जन्म मुंबई के चेंबूर इलाके की तिलक नगर बस्ती में हुआ था। स्कूल छोड़ने के बाद छोटा राजन मुंबई में फिल्म टिकट ब्लैक करने लगा। इसी बीच वह राजन नायर गैंग में शामिल हो गया। अंडरवर्ल्ड की दुनिया में नायर को बड़ा राजन के नाम से जाना जाता था। समय के साथ राजेंद्र (छोटा राजन) बड़ा राजन का करीबी बना और उसकी मौत के बाद गैंग का सरगना बन गया। छोटा राजन जब फरार था तब उस पर भारत में 65 से ज्यादा क्रिमिनल केस दर्ज हो चुके थे। ये मामले अवैध वसूली, धमकी, मारपीट और हत्या की कोशिश के थे। उस पर 20 से ज्यादा लोगों के मर्डर का आरोप लगा। वह जर्नलिस्ट ज्योतिर्मय डे की हत्या में दोषी पाया गया है। इसी मामले में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। राजन नायर गैंग में काम करते हुए उसे छोटा राजन बुलाया जाने लगा। इसी दौरान अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से उसकी जान-पहचान हुई। दाऊद के साथ आने के बाद उसका क्राइम ग्राफ बढ़ गया था। दोनों साथ मिलकर मुंबई में वसूली,  हत्या, स्मगलिंग जैसे काम करने लगे। 1988 में राजन दुबई चला गया। इसके बाद दाऊद और राजन दुनियाभर में गैर कानूनी काम करने लगा लेकिन बाबरी कांड के बाद 1993 में जब मुंबई में सीरियल बम ब्लास्ट हुए तो राजन ने अपनी राह अलग कर ली। जब उसे पता चला कि इस कांड में दाऊद का हाथ है तो वह उसका दुश्मन बन बैठा। उसने खुद को दाऊद से अलग करके नया गैंग बना लिया। 27 साल फरार रहने के बाद छोटा राजन को नवंबर 2015 में इंडोनेशिया से भारत लाया गया।

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