कोरोना वायरस की जांच जारी रखना चाहता है अमेरिका
नई दिल्ली। अमेरिका कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच जारी रखना चाहता है। अमेरिका का मानना है कि ये जानना जरूरी है कि आखिर ये वायरस दुनिया में कहां से फैला। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 90 दिनों के भीतर लैब लीक को लेकर जांच रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यह निष्कर्ष निकालने के लिए सुबूत अपर्याप्त हैं कि क्या यह किसी संक्रमित जानवर के साथ मानव संपर्क से उभरा है या लैब में हुई दुर्घटना से उभरा है। अमेरिका समेत दुनियाभर में एक बार फिर से चीन की वुहान लैब से कोरोना वायरस के लीक होने की जांच की मांग उठने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) एक बार फिर से वुहान लैब से वायरस लीक होने की जांच कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) इस बात का फिर से अध्ययन कर सकता है कि कोरोना (सार्स-कोव-2) वायरस की उत्पत्ति और दुनियाभर में उसका प्रसार संभवतर: चीन की वुहान स्थित लैब से हुआ है। डब्लूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयेसस ने भी आगे के अध्ययन की जरूरत पर सहमति व्यक्त की है।
दरअसल कोरोना वायरस की उत्पत्ति पर स्वतंत्र जांच की मांग अमेरिका की नई रिपोर्ट सामने आने के बाद और तेज हुई है जिसमें कहा गया है कि वुहान लैब के कुछ शोधकर्ता चीन द्वारा 30 दिसंबर 2019 को कोविड-19 के आधिकारिक ऐलान से पहले ही बीमार पड़ गए थे। हालांकि चीन ने इसको नकारा है। वुहान लैब से कोरोना वायरस के लीक होने की खबरों पर बोलते हुए चीन ने एक बार फिर से चुप्पी साध ली है। चीन ने यह प्रश्न टाल दिया कि क्या वह वुहान वायरोलॉजी इंस्टिट्यूट से कोविड-19 के लीक होने के आरोपों की वह स्वतंत्र जांच की अनुमति देगा या नहीं। चीन के शोधार्थियों ने दावा किया है कि यह संक्रमण पैंगोलिन (एक प्रकार की छिपकली) से मनुष्य तक पहुंचा है यानि चीन कहीं से भी इसमें सहयोग करता नहीं दिख रहा है। जांच की मांग पर सवालों के जवाब देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञ समूह द्वारा कोरोना वायरस की उत्पत्ति पर किए गए अध्ययन का हवाला दिया लेकिन इस सवाल को टाल दिया कि कोविड-19 के वुहान लैब से लीक होने के आरोपों की जांच में चीन सहमत होगा या नहीं।
