लोकतंत्र और समानता की भावना का जीवंत उदाहरण है भारत : बिरला

नई दिल्ली/ब्रिजटाउन। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि भारतीय संविधान पिछले 75 वर्षों से देश के लिए पथ.प्रदर्शन का दीपस्तंभ रहा है और इसके कारण भारत ने दुनिया के समक्ष लोकतंत्र और समानता का एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया है।
श्री बिरला ने बारबाडोस की राजधानी ब्रिजटाउन में 68वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन की आम सभा में “राष्ट्रमंडल -एक वैश्विक भागीदार” विषय पर प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए शनिवार को कहा कि लोकतंत्र भारत की आत्मा है, समानता इसका संकल्प है और न्याय इसकी पहचान है। उन्होंने पीठासीन अधिकारियों को अगले साल जनवरी में भारत में होने वाले राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया और कहा कि राष्ट्रमंडल सांसदों के पीठासीन अधिकारी 7 से 9 जनवरी तक होने वाले सीएसपीओसी में भाग लेने के लिए आयें।
लोकसभा अध्यक्ष ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जलवायु परिवर्तन, महामारी, खाद्य असुरक्षा और असमानता जैसे वैश्विक संकट सीमाओं से परे हैं और इनके लिए सामूहिक समाधान की आवश्यकता है। श्री बिरला ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आग्रह किया और इस बात पर ज़ोर दिया कि समाधान अलग-थलग रहकर नहीं ढूंढे जा सकते। श्री बिरला ने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र और सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत पेरिस समझौते के लक्ष्यों को समय से पहले पूरा करने वाला पहला प्रमुख देश बन गया है। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन जैसी पहलों के माध्यम से भारत ने पृथ्वी के प्रति वैश्विक ज़िम्मेदारी पर ज़ोर दिया है।
लोकसभा अध्यक्ष ने महिला सशक्तीकरण की दिशा में भारत के प्रयासों के बारे में बताते हुए पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रावधानों का उल्लेख किया । उन्होंने बताया कि ग्रामीण पंचायती राज संस्थाओं में 31 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों में से 14 लाख से अधिक महिलाएं हैं। इसके अतिरिक्तए उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का भी उल्लेख किया जिसके अंतर्गत संसद और विधान सभाओं में महिलाओं के लिए एक.तिहाई आरक्षण प्रावधान किया गया है और भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं में युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता दिए जाने पर ज़ोर दिया।

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