तमिलनाडु में विजय ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ
नौ अन्य भी मंत्रिमंडल में शामिल
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में एक नया अध्याय लिखते हुए नवगठित पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) के संस्थापक और अभिनेता-राजनेता सी. जोसेफ विजय ने रविवार को राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने इस राज्य में कई दशकों से शासन की बागडोर संभालने वाले दलों द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और अन्नाद्रमुक को हरा कर यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए इन दोनों पार्टियों के लगभग 60 साल पुराने एकाधिकार को समाप्त कर दिया।
रविवार सुबह करीब दस बजे जवाहरलाल नेहरू इनडोर स्टेडियम में आयोजित एक सादे समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने विजय और उनके पहले मंत्रिमंडल के नौ सदस्यों पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। मंत्रियों में टीवीके महासचिव एन. आनंद, आधव अर्जुन, के. एन. सेनगोटियां डॉ. के.जी. अरुणराज, पी. वेंकटरमणन, आर. निर्मल कुमार, राजमोहन, डॉ. टी .के .प्रभु और सुश्री एस. कीर्तना शामिल हैं। इन सभी ने तमिल भाषा में ईश्वर के नाम पर शपथ ग्रहण की।
जब श्री विजय को शपथ के लिए आमंत्रित किया गया और उन्होंने इन शब्दों के साथ शपथ लेना शुरू किया “मैंए सी. जोसेफ विजय” तो इस दौरान दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका ज़ोरदार स्वागत किया। चौंकाने वाली बात यह थी कि श्री विजय ने परंपरागत तमिल पोशाक के बजाए काले रंग की पैंट, सफेद पूरी आस्तीन वाली शर्ट और काले रंग का कोट पहना। इस अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी पहुंचे। विजय सरकार के गठन में कांग्रेस की बेहद अहम भूमिका है। वह मंच पर श्री विजय के ठीक बगल में बैठे हुए दिखाई दिए। श्री विजय ने चुनावी राजनीति में अपनी पहली ही परीक्षा में अपनी पार्टी बनाने के दो साल के अंदर ही शानदार आगाज किया। उन्होंने 108 सीटें जीतीं जिसमें खुद यह अभिनेता.राजनेता दो सीटों से विजयी रहे। श्री विजय दो सीटों से जीते हैं इसलिए उनके पास गणितीय रूप से 107 विधायक ही हैं इसलिए उन्हें आवश्यक 118 विधायकों के समर्थन के लिए 11 सदस्यों की कमी पड़ रही थी। ऐसे में कांग्रेस ने अहम भूमिका निभाई और श्री विजय के लिए बहुमत तैयार करने में मदद की।कांग्रेस के वाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, स्थानीय दल वीसीके ने समर्थन देने की पेशकश की। इससे राज्य में विजय के नेतृत्व में सरकार बनाने का रास्ता खुल गया।
