लोकायुक्त के पास झूठी शिकायत पर तीन साल की होगी सजा

बिहार विधानसभा में विधेयक पारित

पटना। लोकायुक्त के पास दर्ज शिकायत अगर गलत साबित हुई तो आवेदक को जेल जाना होगा। पांच हजार रुपये तक जुर्माना भी देना होगा। गुरुवार को विधानसभा में पेश एक विधेयक के जरिए झूठी शिकायत दर्ज करने वालों के खिलाफ जेल और जुर्माना का प्रावधान किया गया है।
मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने गुरुवार को सदन में बिहार लोकायुक्त संशोधन विधेयक 2021 पेश किया गया। इस पर आए विपक्ष के संशोधनों को सदन ने खारिज करते हुए मूल विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया।मंत्री ने सदन को बताया कि लोकायुक्त के पास बड़े पैमाने पर सरकारी सेवकों के खिलाफ झूठी शिकायतें आ रही हैं। इससे परेशानी हो रही है। शिकायतकर्ता शोषण और दोहन भी करते हैं। लोकायुक्त की सलाह थी कि बिहार में भी अन्य राज्यों की तरह झूठी शिकायतों के खिलाफ दंड देने का कानून बने। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त ही प्रमाणित करेंगे कि कौन शिकायत झूठी है। दोषी करार देने वाले व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का भी अवसर दिया जाएगा। अधिकतम तीन साल की सजा और पांच हजार रुपया के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। मंत्री ने बताया कि दोषी व्यक्ति के खिलाफ सत्र न्यायालय में मामला चलेगा। उन्होंने कहा कि कई अन्य राज्यों में लोकायुक्त के समक्ष झूठी शिकायत के खिलाफ सजा का प्रावधान पहले से है। यादव ने कहा कि सरकारी सेवकों की गड़बड़ी को रोकने के लिए ही राज्य में लोकायुक्त का गठन 2011 में किया गया थाए लेकिन दुरुपयोग की शिकायतों की बहुलता के कारण सरकार को सख्त कदम उठाना पड़ा।मंत्री ने सदन को बताया कि लोकायुक्त के पास बड़े पैमाने पर सरकारी सेवकों के खिलाफ झूठी शिकायतें आ रही हैं। इससे परेशानी हो रही है। शिकायतकर्ता शोषण और दोहन भी करते हैं। लोकायुक्त की सलाह थी कि बिहार में भी अन्य राज्यों की तरह झूठी शिकायतों के खिलाफ दंड देने का कानून बने। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त ही प्रमाणित करेंगे कि कौन शिकायत झूठी है। दोषी करार देने वाले व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का भी अवसर दिया जाएगा। अधिकतम तीन साल की सजा और पांच हजार रुपया के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

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