आर्थिक वृद्धि को निरंतर बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता : सीतारमण

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि को निरंतर बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। श्रीमती सीतारमण यहां एक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में सवालों का जवाब दे रही थीं। पुस्तक का विषय तेजी से बदलती दुनिया में भारत की प्राथमिकता पर केंद्रित है।
देश के वित्त मंत्री के रूप में अपनी तीन प्राथमिकताओं के बारे में पूछे जाने पर श्रीमती सीतारमण ने कहा कि उनके लिए यह प्रश्न मुश्किल है क्योंकि किसी एक प्राथमिकता का उल्लेख करने का मतलब यह समझ जा सकता है कि बाकी चीज का महत्व ही नहीं है। फिर भी उन्होंने कहा कि देश की वृद्धि दर को निरंतर बनाए रखना पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि भारत में सार्वजनिक निवेश में तेज़ी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट निर्देश रहा है कि हमें पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि करनी है। मुझे पूरा विश्वास है कि यह सतत आर्थिक विकास के प्रमुख कारकों में से एक है। उन्होंने प्राथमिकताओं के संदर्भ में कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत को प्रासंगिक बनाए रखना और नेतृत्व की स्थिति में रहकर अन्य देशों के साथ आगे बढ़ना भी एक बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि दक्षिणी दुनिया की आवाज़ को नए सिरे से परिभाषित करना भी भारत की प्राथमिकता होगी।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था को आवश्यक समर्थन देना और प्रत्येक महत्वाकांक्षी वर्ग की आकांक्षाओं को पूरा करना भी उनकी प्राथमिकताओं में है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के बारे में उन्होंने कहा कि इस समय के दौर में बहुपक्षीय व्यापार की तुलना में द्विपक्षीय व्यापार को प्राथमिकता मिल रही है। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार के मोर्चे पर हम आगे बढ़ रहे हैं और पिछले चार.पांच वर्षों में ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन के साथ द्विपक्षीय समझौते हुए हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ बातचीत अच्छी तरह आगे बढ़ रही है। उन्होंने वैश्विक परिदृश्य में तीव्र गति से आ रहे बदलाव के संबंध में कहा कि कि आज बहुपक्षीय संगठनों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि उनका भविष्य क्या है। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में जी 20 द्वारा बहुपक्षी वित्तीय संस्थाओं मैं सुधार के बारे में रिपोर्ट तैयार की गई थी लेकिन अब लगता है कि उसमें और भी विषय शामिल होने चाहिए थे।

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