आइए जानते हैं प्रयाग के बारे में
प्रयाग का नाम सूनते ही दिल एकबार मचल उठता है कि आखिर एकवार यहां जाकर स्नान क्यूं न कर लिया जाए और इसी भावना को लेकर लोग अक्सर प्रयाग की ओर अपना रूख कर देते हैं। चाहे वह बुजूर्ग ही क्यों न हो प्रयाग आने का दिल सभी को करता है। पर क्या आप जानते हैं कि प्रयाग है क्या और इसका इतना महत्व क्यूं है तो आज हम इसी पर चर्चा कर रहे हैं।
प्रयाग भारत का एक अति प्राचीन तीर्थ है। मनुस्मृति के अनुसार हिमालय और विंध्याचल के बीच उस स्थान से पूर्व जहां सरस्वती नदी बालू में यानि रेत में छिप जाती हैं प्रयाग है, और इस प्रयाग के पश्चिम में जो देश है उसे मध्यप्रदेश के नाम से जाना जाता है।
सरस्वती नदी के उद्भव और गंगा-यमुना के संगम होने के कारण इसे लोग त्रिवेणी के नाम से भी जानते हैं।यह विश्व में अपने आप में एक अनूठा स्थल है। गंगा विश्व की सबसे पवित्र नदी मानी जाती है। हिंदू जीर्थ मान्यताओं के अनुसार प्रयाग सभी तीर्थों की आत्मा है। प्रयाग को लोग इलाहाबाद के नाम से भी जानते हैं। प्रयाग का तात्पर्य प्र जोड यज्ञ का स्थान। संसार की संरचना के बाद ब्रह्मा जी द्वारा यज्ञ किए जाने के कारण इसका नाम प्रयाग पडा। प्रयाग एक तीर्थ के साथ ही तपोभूमि भी है।
कूर्म पुराण के अध्याय 39 में लिखा है कि प्रयाग प्रजापति का क्षेत्र है। इसी प्रकार मत्स्य पुराण के अध्याय 108 तथा अग्नि पुराण के अध्याय 111 में इस स्थान को प्रजापति की वेदी बतलायी गई है। वामण पुरान के अध्याय 22 में उल्लेख है कि ब्रह्मा के यज्ञ की पांच वेदियां हैं जिनमें मध्य वेदी प्रयाग है। प्रयाग सतयुगकाल से ही अपना धार्मिक तथा सांस्कृतिक महत्व बनाए हुए अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम स्थल पर स्थित प्रयाग का उल्लेख वेदों, पुरानों, रामायण, महाभारत एवं संस्कृत साहित्य के ग्रंथों में आसानी से मिल जाता है। प्रयाग वैदिक ऋषियों की साधनास्थली और यज्ञों की पावन भूमि रही है। भारतवर्ष के प्रमुख तीर्थो में भी प्रयाग को श्रेष्ठतम तीर्थ माना गया है।
प्रयाग यानि इलाहाबाद आने के लिए रेल की सुविधा भी रही है। इलाहाबाद स्टेशन उतरते ही यहां आसानी से संगम के लिए साधन उपलब्ध हो जाते हैं। लोगों को ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पडता है। लोग आसानी से यहां रोजना आते हैं और पवित्र संगम की जलधारा में स्नान कर अपने को तृप्त करते हैं। संगम स्थल पर दुकाने भी सजी रहती है जहां आसानी से आप पूजा के फूल के साथ ही संगम का जल अपने घर को लाने के लिए पात्र भी प्राप्त कर सकते है। इसके अलावा संगम तट से थोडे फासले पर चाय की दुकानों से लेकर पूजा पाठ की पुस्तकें, पूजा के काम में आनेवाले अन्य सामग्री भी उपलब्ध हो जाते हैं।
