हरियाली तीज का चंद्रमा से है संबंध

भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक हरियाली तीज का व्रत इस साल 27 जुलाई को रखा जाएगा। पति की लंबी आयु और सौभाग्य के लिए इस दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए मां पार्वती और शिव जी की पूजा करती हैं और व्रत रखती हैं। इस दिन कन्याएं और महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। यह सांस्कृतिक उत्सव नहीं है बल्कि महिलाओं के अंतर्मन और प्रकृति के बीच की सूक्ष्म ऊर्जा के सामंजस्य की प्रतीक भी है।
इस दिन किसी भी तरह की मनोकामना की पूर्ति के लिए या मनचाहा वर के लिए गाय के कच्चे दूध से भगवान शिव का अभिषेक करें। इस उपाय को करने से कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है। इस व्रत में चंद्रमा का बड़ा महत्व है क्योंकि वह मन, विचार, भावनाओं और कल्पनाशीलता का कारक होता है। इस दिन के उपायों से न सिर्फ मन मजबूत होता है बल्कि उसे नियंत्रित करना भी जरूरी होता है। इसीलिए महिलाएं निर्जला यह व्रत करते हुए रातभर जागरण करती हैं। मन को बाहरी दुनिया से हटाकर देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती की उपासना करते हुए प्रकृति से जुड़ने का यह समय कथा और भक्ति, भजन जैसे कार्यों से मानसिक एकाग्रता को बढ़ाता है।

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