प्रयागराज में गंगा-यमुना ने मचाई तबाही

प्रयागराज। प्रयागराज में शनिवार को ही गंगा और यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। सुबह 8 बजे गंगा खतरे का निशान पार कर गईं जबकि यमुना करीब तीन बजे के बाद खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गई हैं। गंगा का जलस्तर 84.94 मीटर पहुंच गया है जबकि खतरे का निशान 84.73 मीटर पर ही है। यहां 10 से ज्यादा इलाकों में पानी भर गया है। गंगा अपने खतरे के निशान से 21 सेमी ऊपर बह रही हैं।
बताया जाता है कि गंगा के किनारे के दारागंज, छोटा बघाड़ा, बड़ा बघाड़ा,  करेलाबाग, गौस नगर, सलोरी, गोविंदपुर, शिवकुटी, रसूलाबाद, राजापुर, गंगानगर, अशोकनगर, द्रौपदी घाट,  नीवा, जेके कॉलोनी समेत 3 दर्जन से ज्यादा मोहल्ले तालाब बने हुए हैं। कई जगहों पर तो मकानों की पूरी एक मंजिल तक डूब गई है।  सड़कों और गलियों में नावे चल रही हैं। बाढ़ में फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम भी बुला ली गई है। एनडीआरएफ की टीम मुस्तैदी के साथ बाढ़ ग्रस्त इलाकों में जाकर रेस्क्यू करते हुए लोगों को सुरक्षित निकाल रही हैं।
विदित हो कि प्रयागराज में इसके पहले 2013 में और उसके पहले 1978 में गंगा और यमुना का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया था। तब शहर के अधिकांश इलाके पानी से भर गए थे। लोग घर छोड़कर कहीं और शिफ्ट हो गए थे। अब 2022 में एक बार  1978 और 2013 जैसी स्थिति होने के संकेत मिल रहे हैं।
उधर वाराणसी में इससे पहले 9 सितंबर 1978 को सबसे ज्यादा बाढ़ आई थी। उस दिन गंगा का जलस्तर 73.901 मीटर दर्ज किया गया था। गंगा में आई बाढ़ और वरुणा के उफनाने के कारण शहर से लेकर गांवों तक अब तक तकरीबन 2 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। केंद्रीय जल आयोग का मानना है कि अभी जलस्तर के स्थिर होने की संभावना नहीं है। चंबल सहित अन्य नदियों में आई बाढ़ के कारण वाराणसी में अभी गंगा का जलस्तर और बढ़ेगा।
इधर कानपुर में यमुना नदी उफान पर है। घाटमपुर तहसील के यमुना किनारे के गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। घाटमपुर तहसील के अमीरतेपुर,  मोहटा,  गड़ाथा और कई गांव टापू बन गए हैं। आलम यह है कि विद्यालय, शौचालय और घर डूबे हुए हैं। लोग जान बचाने की गुहार लगा रहे हैं। मवेशियों को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। वहीं, डीएम विशाख ने बाढ़ के हालातों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।

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