रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरियाणा के गुरुग्राम में बहुचर्चित भूमि घोटाले के सिलसिले में व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। भ्रष्टाचार, जालसाजी, धोखाधड़ी और धन शोधन के मामलों से जुड़े आरोपपत्र में रियल एस्टेट क्षेत्र की दिग्गज कंपनी डीएलएफ और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम भी शामिल हैं। यह मामला सितंबर 2008 का है और कथित तौर पर संदिग्ध परिस्थितियों में गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में एक जमीन के टुकड़े की खरीद और पुनर्विक्रय से जुड़ा है।
ईडी की जांच के अनुसार रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ी एक कंपनी ने शिकोहपुर में 7.5 करोड़ रुपये में 3.5 एकड़ जमीन खरीदी थी और इस संपत्ति का म्यूटेशन कथित तौर पर अनियमित तरीके से किया गया था। इसके बाद हरियाणा की तत्कालीन हुड्डा सरकार ने कथित तौर पर 2.7 एकड़ जमीन पर व्यावसायिक कॉलोनी विकास के अधिकार प्रदान किए और वाड्रा की कंपनी को लाइसेंस जारी किया जिसके बाद संपत्ति का मूल्य काफी बढ़ गया। बाद में यह जमीन रियल एस्टेट डेवलपर डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दी गई जिससे उसे भारी मुनाफा हुआ। हुड्डा प्रशासन ने आवासीय परियोजना का लाइसेंस वाड्रा की कंपनी से डीएलएफ को हस्तांतरित करने की भी मंज़ूरी दे दी जिससे नियामक मंज़ूरियों और राजनीतिक प्रभाव पर और सवाल उठ खड़े हुए। संबंधित मामले में मूल प्राथमिकी 2018 में हरियाणा पुलिस ने दर्ज की थी जिसमें रॉबर्ट वाड्रा, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, डीएलएफ और एक प्रॉपर्टी डीलर को नामजद किया गया था। आरोपों में भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और जालसाजी शामिल हैं। इसके आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक समानांतर जांच शुरू की।
ईडी ने अब अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है और विशेष पीएमएलए अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है जिसमें कथित वित्तीय अनियमितताओं और भूमि लेनदेन को सुगम बनाने के लिए राजनीतिक अधिकार के दुरुपयोग का विवरण दिया गया है। ईडी के आरोपपत्र पर रॉबर्ट वाड्रा या डीएलएफ की ओर से हालांकि अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गयी है।
