होली की मस्ती में डूबे दिल्लीवासी, 400 जगह हुआ होलिका दहन


नई दिल्ली। होली को लेकर दिल्ली के बाजारों से लेकर गलियों के साथ ही कॉलोनियों में पूरी तैयारियां हो चुकी हैं। आज प्रातः से ही दिल्लीवासी होली के रंग में रंगते नजर आने लगे हैं। शनिवार को जहां आपफीस के कर्मचारियों ने अपने कार्यालय में होली खेलते देखे गए वहीं स्कूल एवं कॉलेजो में भी छात्र होली के रंग में नजर आए। गुलालों से भरे इनके चेहरे इस बात को प्रमाणित कर रहे थे कि लोगों ने होली शुरू कर दी। वहीं रविवार को होलिका पूजन को लेकर भी दिल्ली में करीब चार सौ जगहों पर तैयारियां पूरी कर ली गई।
मयूर विहार फेज थ्री के घडौली बी ब्लॉक में  स्थित कालू प्रधान चौक पर कालू प्रधान के सौजन्य से होलिका दहन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहां प्रातः दस बजे से ही घरों की महिलाएं होलिका दहन के स्थल पर आकर पूूजन शुरू कर दी थी। बताया जाता है कि यहां हर साल होलिका दहन किया जाता रहा है और इस स्थान पर लोगों का होलिका दहन के समय अच्छा जमावडा लग जाता है। यहां होलिका दहन का कार्यक्रम वडे ही उल्लासपूर्वक मनाया जाता है।

होलिका दहन के इस कार्यक्रम को लेकर कालू प्रधान ने इसकी धार्मिक कथा भी बतायी। उन्होंने कहा कि होली एक ऐसा त्योहार है जहां दुश्मन को भी गले लगा लिया जाता है। लोग रंगों के इस त्योहार में सारी तरह की आपसी खटास को भूल जाते हैं। यह एक ऐसा त्योहार है जो आपसी भाईचारे के साथ ही एकता को बढावा देता है। होलिका दहन के इस कार्यक्रम के अवसर पर पूरे मोहल्ले के गणमान्य लोगों के साथ ही पुलिसकर्मी भी मौजूद थे।

   होलिका दहन के लिए इकठ्ठी की गई सामग्री में नरोत्तम यादव द्वारा अग्नि प्रज्वलित की गई। तत्पश्चात लोगों ने होली के गायन का मजा उठाया। शाम को 6.25 के बाद यहां होलिका दहन किया गया। नरोत्तम यादव बताते हैं कि इस होलिका दहन का धार्मिक महत्व है। इतना ही नहीं दहन के बाद इसके चारों ओर पांच से सात बार तक यदि मनुष्य चक्कर लगाते हैं तो इससे मनुष्य के उपर किए कराए गए सभी बाहरी शक्तियों का विनाश हो जाता है। वे बताते हैं कि गांवों की होली और शहर की होली में अंतर तो जरूर है पर यह आपसी भाईचारे के साथ ही संबंधों को प्रगाढ बनाते हैं। श्री यादव बताते हैं कि यह बात अलग है कि होली के ट्रेंड में कुछ परिवर्तन तो जरूर आया है पर इस बात में कोई दो राय नहीं कि आज भी होली का उतना ही महत्व है जितना पहले हुआ करता था।

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