वंतारा प्राणी केंद्र की जांच के लिए एसआईटी का गठन

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुजरात के जामनगर में रिलायंस फाउंडेशन के वंतारा (ग्रीन्स प्राणी बचाव एवं पुनर्वास केंद्र)  के कामकाज की स्वतंत्र जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का सोमवार को निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने अधिवक्ता सी आर जया सुकिन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए। पीठ ने कहा कि हालांकि याचिका में बिना किसी सहायक सामग्री के केवल आरोप थे और सामान्यतः उन पर विचार नहीं किया जा सकता लेकिन आरोपों की प्रकृति को देखते हुए निष्पक्ष तथ्य.खोज की आवश्यकता है। पीठ ने कहा कि हालांकि इन आरोपों के मद्देनजर कि वैधानिक प्राधिकारी या न्यायालय अपने आदेश का पालन करने के लिए अनिच्छुक या अक्षम हैंए  विशेष रूप से तथ्यात्मक स्थिति की सत्यता के सत्यापन के अभाव में हम न्याय के दृष्टिकोण से एक स्वतंत्र तथ्यात्मक मूल्यांकन की मांग करना उचित समझते हैं जो कथित उल्लंघन यदि कोई हो को स्थापित कर सके।
न्यायालय ने निर्देश दिया कि विशेष जांच दल का नेतृत्व शीर्ष न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर करेंगे। अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति राघवेंद्र चौहान,  उत्तराखंड और तेलंगाना उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीश हेमंत नागराले, आईपीएस पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त और अनीश गुप्ता,  आईआरएसए अतिरिक्त सीमा शुल्क आयुक्त शामिल हैं। विशेष जांच दल को अन्य पहलुओं के अलावा भारत और विदेशों से जानवरों विशेष रूप से हाथियों का अधिग्रहणए वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम 1972 का अनुपालन और उसके तहत चिड़ियाघरों के लिए बनाए गए नियमों को शामिल करते हुए एक व्यापक जांच करने का काम सौंपा गया है। पीठ ने यह भी कहा कि वंतारा से संबंधित मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन को वैधानिक प्राधिकारियों या वंतारा पर ही संदेह उत्पन्न करने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि एसआईटी का कार्य केवल तथ्य.खोज तक ही सीमित है, न कि दायित्व या दोषसिद्धि के मुद्दों पर निर्णय देना। पीठ ने कहा कि एसआईटी की नियुक्ति की गलत व्याख्या मौजूदा नियामक या संस्थागत तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के रूप में नहीं की जानी चाहिए। न्यायालय ने एसआईटी को 12 सितंबर या उससे पहले अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया।

 

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