जमीन मापी के लंबित आवेदनों का निपटारा 31 तक : नीतीश
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को बताया कि जमीन मापी के लिए लंबित आवेदनों का निपटारा विशेष भूमि मापी अभियान चलाकर 31 जनवरी 2026 तक कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री कुमार ने राज्य में भूमि मापी प्रक्रिया को सरलए पारदर्शी और समयबद्ध बनाने को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की है।
श्री कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 20 नवंबर 2025 को राज्य में नई सरकार के गठन के कुछ ही दिनों बाद बिहार को देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल करने के लिए सात निश्चय-3 के कार्यक्रमों को लागू किया है। उन्होंने कहा कि सात निश्चय-3 (2025-30) के सातवें निश्चय “सबका सम्मान, जीवन आसान” का मुख्य मकसद राज्य के सभी नागरिकों के दैनिक जीवन में आने वाली कठिनाइयों को कम कर उनके जीवन को और भी आसान बनाना है। इसे लेकर सरकार लगातार महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है।
श्री कुमार ने कहा कि कई बार ऐसा देखा गया है कि राज्य में जमीन मापी कराने के इच्छुक लोगों द्वारा आवेदन देने के बाद जमीन मापी की प्रक्रिया संपन्न होने में काफी वक्त लग जाता है। इस कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जमीन की समय पर मापी नहीं होने के कारण अनावश्यक भूमि विवाद उत्पन्न होते हैं। ऐसे में “सबका सम्मान,जीवन आसान” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भूमि मापी की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी, समयबद्ध एवं नागरिक अनुकूल बनाने के लिए निर्णय लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री श्री कुमार ने बताया कि 31 जनवरी 2026 तक जमीन मापी के लिए लंबित आवेदनों का निपटारा विशेष भूमि मापी अभियान चलाकर कर दिया जाएगा।उन्होंने बताया कि एक अप्रैल 2026 से अविवादित जमीन की मापी के लिए आवेदक द्वारा मापी शुल्क जमा किए जाने के अधिकतम सात कार्य दिवस में जमीन की मापी सुनिश्चित की जाएगी तथा विवादित जमीन की मापी के लिए आवेदक द्वारा मापी शुल्क जमा किए जाने के अधिकतम 11 कार्य दिवस में जमीन की मापी सुनिश्चित की जाएगी।श्री कुमार ने बताया कि अविवादित तथा विवादित जमीन की निर्धारित कार्य दिवस में मापी की प्रक्रिया पूर्ण कर अमीन द्वारा मापी का प्रतिवेदन मापी के पश्चात आवेदक के आवेदन की तिथि के 14वें दिन निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
