मनीष सिसोदिया को कोर्ट से नहीं मिली राहत

नई दिल्ली। आबकारी नीति घोटाले में जेल में बंद दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम और आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया को राउज एवेन्यू कोर्ट से राहत नही मिली। दिल्ली आबकारी नीति घोटाले में आज कोर्ट में सुनवाई हुई। मनीष सिसोदिया और अन्य गिरफ्तार आरोपियों की न्यायिक हिरासत 18 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है।
शनिवार को कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान ईडी ने बचाव पक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि आरोपियों की अर्जियां ये दर्शाती है कि आरोपियों की ओर से पूरी कोशिश की गई है कि मुकदमा शुरू न हो सके। कोर्ट में पेशी के दौरान 207 सीआरपीसी अनुपालन में देरी को लेकर ईडी और आरोपी मनीष सिसोदिया के बीच बहस हुई। इस दौरान जज ने दस्तावेजों के निरीक्षण में हो रही देरी को लेकर दोनों से सवाल पूछे। कोर्ट ने ईडी से जवाब मांगा है कि प्रत्येक आरोपी ने अब तक दस्तावेजों के निरीक्षण में कितना समय लिया है। ईडी की तरफ से वकील जोएब हुसैन ने कहा कि सिसोदिया का मुख्य तर्क मुकदमे में देरी पर है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ये जमानत का आधार है। लेकिन आरोपी की तरफ से इस मामले में मेरिट और अपराध की गंभीरता पर ज़्यादा बात नहीं की गई है। ईडी ने कहा कि मैं भी मुकदमे मे हुई देरी के सवाल पर जवाब देना चाहूंगा। ऐसा नहीं है कि अगर मुकदमे मे सुनवाई आगे नहीं बढ़ी है तो जमानत याचिका स्वीकार कर ली जानी चाहिए। इस पूरे मामले को मेरिट के आधार पर देखना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि सम्पूर्ण तथ्य पर विचार किया जाना चाहिए। ईडी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा था कि ट्रायल कोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के फैसले में की गई टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना सिसोदिया की जमानत अर्जी पर विचार करेगी। अब फालतू आवेदन दायर किए जा रहे है। ये आवेदन समय बर्बाद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लगातार कोई न कोई आरोपी इस तरह के आवेदन दायर करता रहता है जो दिखाता है कि मुकदमा शुरू न हो। ईडी का कहना है कि मुकदमा धीमी गति से चला है या नहीं चला है इसके लिए अभियोजन पक्ष जिम्मेदार नही है। अभियोजन पक्ष की ओर से कोई देरी नहीं हुई है। सुनवाई मे 31 आरोपियों की ओर से 95 अर्जियां लगाई गई है। अगर किसी भी तरह की देरी हुई है तो यह आरोपी की वजह से हुई है।अभियोजन पक्ष के कहने पर नहीं। इस मुद्दे पर भी कोर्ट को ध्यान देना होगा। अगर मैं यह साबित करूं कि मुकदमे मे देरी कुछ आरोपी की वजह से और कुछ सह.आरोपियों की वजह से हुई है तो उस पर भी विचार करना होगा, लेकिन इसके बावजूद इस मामले में पीएमएलए की धारा 45 का वजूद कायम है। जमानत की सुनवाई मे इसको भी देखना होगा।

Leave A Reply

Your email address will not be published.