आयुर्वेद और योग से बढाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता

शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को हम अपने दैनिक नियमित दिनचर्या,  खानपान, पर्याप्त नींद एवं योग क्रियाओं के माध्यम से क्षमता अनुसार बहुत ही अच्छे ढंग से बढ़ा सकते हैं। सुपाच्य स्वादिष्ट भोजन विशेष रूप से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर साबित होता है। खाने.पीने की भोज पदार्थ तो हम नित्य दैनिक जीवन में खाते ही हैं परंतु रोग प्रतिरोधक क्षमता विशेष रूप से बढे इसके लिए हमें क्या सेवन करना चाहिए आज हम इसी विषय पर चर्चा करते हैं।

फल में संतरा, मौसमी, नींबू, अनानास, सेब, नाशपाती, पपीता, कीवी, तरबूज, अनार, पका आम, गाजर, चुकंदर इत्यादि का सेवन समयानुसार हितकर होता हैं।अगर ड्राई फ्रूट की बात की जाए तो इसमें अखरोट, अंजीर, तरबूज के बीज, छुहारा,  कागजी बादाम , एलमंड, मुनक्का, खजूर इत्यादि हितकर होता है।सुबह खाली पेट एवं दिन के भोजन से पहले फल एवं मेवे का सेवन ज्यादा हितकर होता है। यह हमारे शरीर के अंदर क्षाड़िए गुण को बढ़ाता है जिससे दीपन और पाचन, भूख लगना और पचाने की  क्रिया में बढ़ोतरी होती है। हरी सब्जियों का सेवन भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है। हरी सब्जियों में बंद गोभी,  गांठ गोभी,  ब्रोकली, शिमला मिर्च, बैगन, धिया, मूली,  टमाटर,  भिंडी, बींस, परवल, करेला, सहजन, कच्चा केला इत्यादि का सेवन लाभदायक होता है। साग में सहजन के कोमल पत्ते हरा एवं लाल साग, पालक, बथुआ, गेधारी, कुसुम इत्यादि के सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है। पौष्टिक आहार मे विशेष प्रोटीन युक्त पनीर, मशरूम, चीज,  छेना, अंकुरित अनाज इत्यादि का सेवन करना चाहिए जो हमारे शरीर मे रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है। पेय पदार्थों मे गाय, बकरी, ऊंट के गरम दूध में एक चम्मच हल्दी सुबह नाश्ते के बाद एवं रात में सोते समय लेना अत्यंत हितकर माना गया है। मुलेठी, तुलसी, सोठ,  पीपल (पिपली) काकड़ा सिंगी,मरीच, अश्वगंधा, गिलोय इत्यादि एकत्रित करके कूट पीस पाउडर बना ले। एक से दो चम्मच 300 एमएल पानी में मिलाकर हल्की आंच पर पकावें, 75एमएल पानी बच जाने पर खंड गुड़ या चीनी या काला नमक मात्रा अनुसार मिलाकर सेवन करें तो इससे भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है। अगर आप चाहें तो इसमें चाय पत्ती भी मिलाकर मसालेदार चाय का स्वाद ले सकते हैं। इस काढ़ा को सुबह शाम ले।
फलों के रस मे नारियल पानी, संतरा, आंवला, अनन्नास, मौसमी, अनार इत्यादि का मिला हुआ रस मात्रा अनुसार एवं समयानुसार ले। यह एक अत्यंत ही एंटीऑक्सीडेंट पेय है। तांबे के पात्र में जिसमें 1 से 2 लीटर पानी आता हो उसमें 10 ग्राम मेथी दो से चार छोटी हर्रे 5 से 10 लौंग, 5 ग्राम दालचीनी, थोड़ा अजवाइन, इत्यादि गर्म पानी में पका लें और उस गर्म पानी को पात्र में रख ले यथा अनुसार पानी का सेवन करें। यह पानी शरीर में उपस्थित विषीकरण (विजातीय) पदार्थ टॉक्सिन को मल मूत्र द्वारा बाहर निकाल देगा। काली मिर्च, लॉन्ग, सोंठ, हल्दी, तुलसी, सेंधा नमक इत्यादि का काढ़ा बना ले, हल्के गुनगुने काढ़े से सुबह.शाम गारगल करें इससे मुख एवं मुख के अंदर कंठ तक की अच्छी तरीके से सफाई होगी।इसके अलावा. चयवनप्राश का सेवन प्राचीन काल से शरीर की ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इसमें अनेकों प्रकार की जड़ी बूटियां, शरीर की ऊर्जा शक्ति एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए मिलाई गई है। एक से दो चम्मच सुबह शाम दूध में हल्दी के साथ सेवन करें तो शरीर में स्फूर्ति के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है।
योग की बात की जाए तो हम कह सकते हैं कि यह जीवन की अमृततुल्य संजीवनी है। कुछ योगासन एवं प्राणायाम इस प्रकार हैं जो संभव लगे उसे सहज भाव से करना चाहिए। योग सुबह खाली पेट आधा से एक घंटा एवं दिन के भोजन के 3 घंटा बाद आसानी से कर सकते हैं। बैठ कर किए जाने वाले आसन में हमेशा ख्याल रखें की रीढ की हड्डी एवं गर्दन सीधी रहे। अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो किसी योग गुरु के सानिध्य में योग करें। बलपूर्वक योग नहीं करें। सहज ढंग से योग करें, योग आपके मन और तन को संतुलित करता है।  कुछ सहज योग आसन और प्राणायाम इस प्रकार हैं….भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम विलोम, नाड़ी शोधन, शीतली और शीतकारी प्राणायाम इत्यादि। आसन की बात की जाए तो इसमें पवनमुक्तासन, ब्रज आसन, नौका संचालन, साइकिल चालन आसन, स्कंध चक्र आसन, सूर्य नमस्कार, मकरासन, शशांक आसन इत्यादि।
योग में ध्यान का बहुत ही महत्व है। आसन प्राणायाम के पहले और बाद में ध्यान सहज भाव से करने पर योगिक क्रियाएं और भी सहज हो जाती है।योग योग गुरु के सानिध्य में करना ज्यादा हितकर होता है अतः योग के लिए योग गुरु का सानिध्य प्राप्त करें।
लेखक : सुनील कुमार मिश्रा (आयुर्वेद एवं योग विशेषज्ञ)

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