वैक्सीन पर घिरी अमरिंदर सरकार
विवाद के बाद सीएम ने प्राइवेट अस्पतालों में सप्लाई बंद की
चंडीगढ़। पंजाब में वैक्सीन को लेकर अमरिंदर सिंह विपक्ष के निशाने पर हैं। दरअसल अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने गुरुवार को आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने कोवैक्सिन के 40 हजार डोज प्राइवेट अस्पतालों को भारी कीमतों पर बेचे हैं। सरकार कंपनियों से 400 रुपए में वैक्सीन खरीदकर अस्पतालों को एक हजार से ज्यादा रुपए में बेच रही है। इसके बाद लोगों को वैक्सीन के लिए 1500 से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। यह अपने आप में एक बड़ा घोटाला है।
भाजपा ने भी कांग्रेस सरकार पर हमला बोला और इसे मुनाफाखोरी बताया। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शुक्रवार को कहा कि राहुल गांधी दूसरे राज्यों पर बोलने से पहले अपने कांग्रेस वाले राज्य पंजाब को देखें। पंजाब को 1.40 लाख कोवैक्सिन के डोज 400 रुपए प्रति डोज के हिसाब से उपलब्ध कराए गए थे और उन्होंने प्रत्येक डोज 1000 रुपए के हिसाब से प्राइवेट हॉस्पिटलों को बेच दिए।
इन आरोपों के बाद पंजाब सरकार बैकफुट पर आ गई। सरकार ने शुक्रवार शाम को ही प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीन बेचने का अपना फैसला वापस ले लिया है। इसके साथ ही आदेश दिया कि निजी अस्पतालों को अब तक जितने भी डोज भेजे गए हैं उसे भी वापस मंगवाया जाए। इतना ही नहीं जो खुराक लोगों को दी जा चुकी है उसे वैक्सीन प्रोडक्शन कंपनी द्वारा अस्पतालों को मिलने के बाद राज्य सरकार को लौटाना भी होगा।
पंजाब सरकार के प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीन बेचने के फैसले पर विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध किया था। अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने आरोप लगाया था कि पंजाब सरकार ने कोवैक्सिन के 40 हजार डोज प्राइवेट अस्पतालों को भारी कीमतों पर बेचे हैं। सरकार कंपनियों से 400 रुपए में वैक्सीन खरीदकर अस्पतालों को एक हजार से ज्यादा रुपए में बेच रही है। इसके बाद लोगों को वैक्सीन के लिए 1500 रुपए से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
विदित हो कि भारत बायोटेक राज्यों को 400 रुपए प्रति डोज के हिसाब से वैक्सीन बेचती है। यानी पंजाब सरकार ने 40 हजार डोज के लिए 1.60 करोड़ रुपए दिए। बादल के मुताबिक राज्य सरकार ने अगर 40 हजार डोज 1060 रुपए के हिसाब से बेचे तो कुल 4.24 करोड़ जुटाए। यानी 2.64 करोड़ का फायदा। अब प्राइवेट अस्पताल अगर एक व्यक्ति से 1560 रुपए ले रहे हैं। यानी 40 हजार के हिसाब से वे 6.24 करोड़ रुपए जुटाएंगे। यानी 2 करोड़ का फायदा। कुल मिलाकर राज्य सरकार और निजी अस्पतालों की इस मिलीभगत में आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इससे पहले पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री ने आरोपों पर सफाई देते हुए कहा था कि उनके विभाग का वैक्सीन पर कंट्रोल नहीं है। हम सिर्फ कोरोना मरीजों का इलाज, सैंपलिंग वैक्सीनेशन की व्यवस्था देख रहे हैं। अगर ऐसा है तो इस मामले की जांच कराई जाएगी। मैं खुद इसकी जांच करुंगा।
