भारत-श्रीलंका के बीच हैं ऐतिहासिक, सांस्कृतिक संबंध : बिरला

नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत तथा श्रीलंका के बीच गहरे ऐतिहासिकए सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध रहे हैं जो आज एक मजबूत बहुआयामी साझेदारी में बदल चुके हैं। श्री बिरला ने श्रीलंका.भारत संसदीय मैत्री संघ के 24 सदस्यीय शिष्टमंडल से संसद भवन मे भेंट की। इस शिष्टमंडल का नेतृत्व श्रीलंका के स्वास्थ्य एवं जनसंचार मंत्री तथा श्रीलंका.भारत संसदीय मैत्री संघ के अध्यक्ष डॉ. नलिन्दा जयतिस्सा ने किया।
इस दौरान श्री बिरला ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच गहरे ऐतिहासिकए सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध रहे हैं। यह संबंध आज एक मजबूत बहुआयामी साझेदारी में बदल चुके हैं। भारत की नेबरहुड फर्स्ट नीति और विजन सागर में श्रीलंका का विशेष महत्व है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अप्रैल 2025 की श्रीलंका यात्रा और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की दिसंबर 2024 की भारत यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में मील का पत्थर बताया। श्री बिरला ने श्रीलंका की वर्तमान संसद में भारत.श्रीलंका संसदीय मैत्री संघ की स्थापना का स्वागत करते हुए कहा कि यह द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की संसदों के बीच संस्थागत सहयोग और नियमित संवाद की आवश्यकता है जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और जनप्रतिनिधियों के अनुभव साझा किए जा सकें। दोनों देशों की संसदों के बीच आपसी संवाद और अनुभवों का आदान.प्रदान लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि दोनों देशों की साझी विरासत हजारों वर्षों पुरानी है। भारत और श्रीलंका के द्विपक्षिय संबंधों मे गहरे सांस्कृतिक और लोगों के बीच आपसी संबंधए महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने रामायण और बौद्ध पर्यटन सर्किटों के विकास, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच बढ़ते संपर्क को द्विपक्षीय संबंधों की सुदृढ़ता का आधार बताया। श्रीलंका के स्वास्थ्य एवं जनसंचार मंत्री तथा श्रीलंकाई प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष डॉ. नलिन्दा जयतिस्सा ने श्रीलंका में आर्थिक संकट के दौरान प्रथम प्रतिक्रियादाता के रूप में सहायता के लिए भारत को धन्यवाद दिया । डॉ. नलिन्दा जयतिस्सा ने हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए भारत की भूमिका की सराहना की । भारत और श्रीलंका के बीच वर्तमान सहयोग अब निवेश आधारित विकास, अनुदान सहायता,  व्यापार,  पर्यटन, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान.प्रदान पर केन्द्रित है। दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्यए संचार और धार्मिक पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी कई समझौते किए हैं।

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