बहुरेंगे दिन पुनौरा धाम जानकी मंदिर के
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं सीएम नीतीश ने किया भूमि पूजन और शिलान्यास
पटना। आठ अगस्त को सीतामढ़ी के पुनौरा धाम जानकी मंदिर का भूमि पूजन और शिलान्यास केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम रहा। केंद्रीय गूह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को बिहार के सीतामढ़ी में माता जानकी मंदिर का भूमिपूजन किया। सीएम नीतीश कुमार शिलान्यास व भूमि पूजन में उनके साथ रहे। शाह ने सीतामढ़ी से अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन को भी हरी झंडी भी दिखाई। इस अवसर पर केंद्रीय गूह मंत्री श्री शाह ने कहा कि यह केवल बिहार के लिए ही नहीं बल्कि देश के लिए भी शुभ दिन है। उन्होंने कहा कि माता सीता का जन्म जहां हुआ उस पुनौराधाम मंदिर में यह काम हो रहा है। उन्होंने सीएम नीतीश कुमार का अभिनंदन करते हुए कहा कि बिहार सरकार ने इस धाम के विकास के लिए बड़ा काम किया है। उन्होंने कहा कि आज मैं यहां आया हूं तो एक बात बताना चाहता हूं कि यह जो हमारा मिथिलांचल है, यह मिथिला की ही संस्कृति नहीं है। यह भारतीय संस्कृति का अनन्य गहना है। यहां अकाल के दौर में राजा जनक ने हल चलाया तो मां जानकी प्रकट हुईं। उस दिन बारिश के लिए राजा जनक ने हल चलाया था और आज भूमि पूजन पर भी बारिश हो रही है। उन्होंने कहा कि 890 करोड़ रुपए की लागत से यहां मां जानकी का भव्य स्मारक और मंदिर बन रहा है। 137 करोड़ रुपए मौजूदा मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए खर्च होगा। शाह ने मंदिर में किए जा रहे विकास कार्यों की चर्चा की।
माता सीता की यह जन्मस्थली अयोध्या के श्रीराम मंदिर की तर्ज पर बनेगा। मंदिर का परिसर न सिर्फ श्रद्धा का केंद्र बनेगा बल्कि सीतामढ़ी शहर भी विकसित और विस्तृत धार्मिक नगरी के रूप में उभरेगा। बिहार सरकार ने इसके लिए ₹882 करोड़ 87 लाख की योजना को स्वीकृति दी है। इस योजना के तहत मंदिर परिसर के समग्र विकास हेतु 50 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है जिसकी कुल लागत ₹165 करोड़ 57 लाख आंकी गई है। इस भूमि को मिलाकर अब पुनौरा धाम का कुल क्षेत्रफल 67 एकड़ हो जाएगा जो नियोजित विकास. सुविधाओं और धार्मिक महत्ता के मामले में मौजूदा सीतामढ़ी शहर से कहीं ज्यादा सुव्यवस्थित और व्यापक होगा। मंदिर परिसर को वही वास्तुशिल्प फर्म डिज़ाइन कर रही है जिसने अयोध्या का राम मंदिर बनाया है। प्रस्तावित मंदिर की ऊंचाई 156 फीट होगी, जो अयोध्या के मंदिर से मात्र 5 फीट कम होगी। क्षेत्रफल और सुविधाओं के लिहाज़ से यह परियोजना किसी भी राष्ट्रीय धार्मिक केंद्र से कम नहीं होगी।
