त्रिपुरा शरणार्थी कैंप से भागे 10 बंगलादेशी नाबालिग
अगरतला। अगरतला के पास शरणार्थी शिविर से पिछले पांच दिन से 10 बंगलादेशी नाबालिगों के लापता होने की सूचना मिलते ही त्रिपुरा पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने तलाशी अभियान तेज कर दी है। पुलिस के स्थानीय इलाकों में तलाशी अभियान शुरू करने तक गत रात तक इस मामले में स्थिति साफ नहीं हो पायी थी। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, ये नाबालिग 29 सितंबर को दुर्गा पूजा के पहले दिन भारत-बंगलादेश सीमा पर हवाई अड्डे के निकट स्थित नरसिंहगढ़ शिविर से भाग गए जबकि वहां पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।
पुलिस महानिदेशक इस बात की जांच के आदेश दे दिए हैं कि कड़ी सुरक्षा वाले इस प्रतिष्ठान से यह भागने की घटना कैसे घटी तथा उन्होंने इसकी एक विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।
उन्होंने भरोसा दिया कि सीमा सुरक्षा के अलावा अन्य सुरक्षा एजेंसियों को भी चल रहे तलाशी अभियान के साथ सतर्क कर दिया गया है। कांग्रेस विधायक सुदीप रॉयबर्मन ने कहा कि पुलिस द्वारा पांच दिनों से लापता व्यक्तियों का पता न लगा पाना चिंता का विषय है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि वे सीमा पर सुरक्षा खामियों का फायदा उठाकर बांग्लादेश में घुस गए होंगे। साथ ही कांग्रेस विधायक ने ड्यूटी पर तैनात पुलिस और बीएसएफ कर्मियों दोनों की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
नरसिंहगढ़ में किशोर गृह के निकट स्थित यह शरणार्थी शिविर बांग्लादेशी नागरिकों और अन्य विदेशी बंदियों के लिए अस्थायी हिरासत केंद्र के रूप में कार्य करता है जिन्हें अपनी सजा पूरी करने के बाद अपने देश वापस भेजे जाने की व्यवस्था होने तक वहां रखा जाता है। इस सुविधा केंद्र की सुरक्षा का प्रबंधन पुलिस अधिकारियों और समाज कल्याण एवं सामाजिक शिक्षा विभाग के कर्मचारियों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है। हालांकि हाल ही में 10 बांग्लादेशी नाबालिगों के भागने की घटना ने इन सुरक्षा इंतजामों की प्रभावशीलता पर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। यह घटना उत्तरी त्रिपुरा के धर्मनगर में हुई एक और परेशान करने वाली घटना के तुरंत बाद हुई है जहां उप-जेल के छह कैदियों ने एक जेल प्रहरी पर हमला किया और भाग निकले। भागने वालों में से दो को बाद में पकड़ लिया गया है। नरसिंहगढ़ में इस तरह की सुरक्षा भंग की यह पहली घटना नहीं है। बांग्लादेशी बंदियों के भागने के पहले भी मामले सामने आए हैं जिन्हें अंततः पुनः पकड़ लिया गया था। अधिकारी कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार किशोरों के वर्तमान समूह को बांग्लादेश वापस भेजने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन इन औपचारिकताओं के पूरा होने से पहले ही वे भाग निकले। इस भागने की घटना से समुदाय में काफी आक्रोश फैल गया है और कानूनी एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है जिससे जवाबदेही तय करने तथा शरणार्थी केंद्रों में सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग उठने लगी है।
