उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ ही कार्तिक छठ संपन्न

विधायक कुलदीप ने की सभी के कल्याण की कामना

नई दिल्ली। सिर पर दउरा और सूपली लेकर घाटों की ओर जाते लोग, पीछे-पीछे छठ माता के गीत गाते चल रहीं महिलाएं, साथ में पटाखे जलाते बच्चे,  ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच छठ माता के जयकारे, सोमवार को नगर में छठ महापर्व को लेकर लोगों में उल्लास नजर आया। घाटों पर मेले जैसा दृश्य दिखा। महिलाओं ने वेदी पर पूजा.अर्चना के बाद अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। फिर घर लौटकर पूजा-पाठ में जुट गईं। कई घरों में कोसी भरी गई। मंगलवार की सुबह महिलाएं उगते उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही चार दिनों के महापर्व का समापन किया।
“कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए… जोड़े-जोड़े फलवा सुरूज देव… पहिले पहिल हम कइनी छठ मईया व्रत तोहार”” जैसे गीतों की गूंज के बीच छठ घाटों पर पानी में खड़ीं महिलाएं और पुरुष उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देते नजर आए। यह नजारा सोमवार की शाम और मंगलवार सुबह को शहर से लेकर गांव तक नदी और तालाब के किनारे बने घाटों पर देखने को मिला। मयूर विहार फेज थ्री के रेड फॉक्स स्थित डीडीए पार्क, पुरानी कोंडली नहर, आई टी ओ स्थित बनाए गए छठ पूजा के लिए बने द्याटों पर छठ पूजा को लेकर उमडी भीड इस बात की साफ गवाही दे रही थी कि आस्था का यह पर्व सभ्यता, संस्कृति, आपसी भेद-भाव को भुलकार एक दूसरे के प्रति कितने समर्पित है। इसके अलावा दिल्ली के अन्य घाटों पर भी व्रतधारियों ने पूजा-अर्चना कर पुत्र की सलामती और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ पूजा अचैना करते नजर आए। इस अवसर पर जहां एक ओर लोगों तथा आयोजक मंडलों ने ब्रतधारियों को पूजा में कोई व्यवधान न हो इसके लिए मुस्तैद नजर आए वहीं दिल्ली पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था भी काफी सख्त नजर आयी। किसी भी प्रकार की कोई अप्रिय घटना न हो इस बात को लेकर पुलिस काफी सतर्क नजर आयी।
मयूर विहार फेज थ्री के रेड फॉक्स स्थित डीडीए पार्क  में छठ पूजा को लेकर पूर्व वर्षो की भांति इस वर्ष भी छठ पर्व का आयोजन किया गया था। पहले की संख्या में घाटों की संख्या बढाई गई थी। वहीं यहां आम आदमी पार्टी के विघायक कुलदीप कुमार मोनू ने खुद घाटों का निरीक्षण कर एवं ब्रतधारियों के साथ आए परिजनों से बातें की और इस पूजा में किसी प्रकार का कोई कष्ट न हो इसका जाएजा लिया तथा अपने तमाम कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे घाटों पर मुस्तैद रहें ताकि कोई व्यवधान उत्पन्न न हो। पुलिस  सुरक्षा सुरक्षा की बात की जाए तो  महिला जवानों के साथ ही पुरूष जवान भी नजर आए। इस स्थान पर एक रंगारम कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया था जिसमें बच्चों ने अपने गायन के साथ ही नृत्य की प्रस्तुति भी दी।
इस अवसर पर विधायक मोनू ने बताया कि लोक आस्था का यह महापर्व “छठ” मनाने की परंपरा रामायण और महाभारत काल से ही रही है। छठ वास्तव में सूर्योपासना का पर्व है। इसलिए इसे सूर्य षष्ठी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इसमें सूर्य की उपासना उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए की जाती है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन सूर्यदेव की अराधना करने से व्रती को सुख, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस पर्व के आयोजन का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में भी पाया जाता है। इस दिन नदियों, तालाब या फिर किसी पोखर के किनारे पर पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। छठ को पहले केवल बिहार, झारखंड और उत्तर भारत में ही मनाया जाता था, लेकिन अब धीरे-धीरे पूरे देश में इसके महत्व को स्वीकार कर लिया गया है। छठ पर्व षष्ठी का अपभ्रंश है। इस कारण इस व्रत का नामकरण छठ व्रत हो गया। छठ वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक माह में। चैत्र शुक्लपक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ पर्व को “चैती छठ” और कार्तिक शुक्लपक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले पर्व को “कार्तिक छठ” कहा जाता है। श्री मोनू ने कहा कि मैंने छठी मइया से प्रार्थंना की है कि सभी का कल्याण हो और समाज में आपसी भाईचारा सदा बना रहे। देश उन्नति के मार्ग पर सदा चलता रहे।

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