मणिपुर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने का प्र्रस्ताव पारित
नई दिल्ली। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की अवधि छह महीने और बढ़ाने से संबंधित सांविधिक संकल्प बुधवार को लोक सभा में ध्वनिमत से पारित हो गया।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संकल्प पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि मणिपुर में शांति बहाल हो रही है, वहां कानून.व्यवस्था की स्थिति सुधर रही है। वहां राष्ट्रपति शासन के दौरान हिंसा की एक मात्र घटना हुई जिसमें एक व्यक्ति की जान गयी। राज्य में चार महीने से हिंसा की कोई घटना नहीं हुई। उन्होंने कहा कि वहां शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए राष्ट्रपति शासन जरूरी है। उनका यह भी कहना था कि मणिपुर में हिंसक घटनाओं में बाहर के लोगों की संलिप्तता रही है। श्री रॉय ने कहा कि मणिपुर सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने अब तक के कार्यकाल में पूर्वोत्तर का 78 बार दाैरा किया है। पूर्वोत्तर के विकास और वहां के लोगों के सशक्तीकरण के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार का पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास पर पूरा ध्यान है इसलिए “एक्ट ईस्ट. एक्ट फास्ट” का नारा दिया गया है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में पूर्वोत्तर क्षेत्र में हिंसक घटनाओं में 78 प्रतिशत की कमी आयी है। इस दौरान 10,600 विद्रोहियों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने कहा कि मणिपुर में हिंसा उच्च न्यायालय के आरक्षण से संबंधित एक आदेश के बाद जारी हुई थी। मणिपुर की हिंसा जातीय थी, वहां धर्म के आधार पर हिंसा होने के आरोप निराधार है। वहां दो धर्मों के बीच कोई संघर्ष नहीं था।
